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मनमानी नियुक्ति पर मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति तलब
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 14 Aug 2015 02:12 AM IST
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इलाहाबाद(ब्यूरो)। डिग्री कालेज के प्राचार्य पद पर मनमाने तरीके से नियुक्ति करने के मामले में हाईकोर्ट ने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एन के तनेजा को तलब कर लिया है। कोर्ट ने उनको इस मामले में दो बार जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था मगर जवाब देने के बजाए कुलपति मनमाने आदेश पारित करते रहे। कोर्ट ने उनको 21 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
डॉ. आरपी सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति एके मिश्रा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। याची के वकील सीमांत सिंह के अनुसार मेरठ विश्वविद्यालय से संबद्ध लाजपत राय पीजी कालेज साहिबाबाद गाजियाबाद के प्राचार्य पद पर एसपी कौशिक की नियुक्ति एक वर्ष के लिए तदर्थ रूप से की गई थी। इसके साथ यह शर्त रखी गई कि अगले पांच वर्षों पर प्राचार्य पद के लिए आवश्यक अर्हता प्राप्त कर लेंगे। मगर 20 वर्ष बाद भी उन्होंने अर्हता प्राप्त नहीं की।
कुलपति उनका कार्यकाल समाप्त करने के बजाए बढ़ाते रहे जबकि विश्वविद्यालय के परिनियमों में उनको ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। इस पर अदालत ने कुलपति को बार अपना पक्ष रखने का मौका दिया था मगर उनकी ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया इसलिए उनको व्यक्तिगत रूप से 21 अगस्त को हाजिर होने के लिए कहा गया है।
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डॉ. आरपी सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति एके मिश्रा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। याची के वकील सीमांत सिंह के अनुसार मेरठ विश्वविद्यालय से संबद्ध लाजपत राय पीजी कालेज साहिबाबाद गाजियाबाद के प्राचार्य पद पर एसपी कौशिक की नियुक्ति एक वर्ष के लिए तदर्थ रूप से की गई थी। इसके साथ यह शर्त रखी गई कि अगले पांच वर्षों पर प्राचार्य पद के लिए आवश्यक अर्हता प्राप्त कर लेंगे। मगर 20 वर्ष बाद भी उन्होंने अर्हता प्राप्त नहीं की।
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कुलपति उनका कार्यकाल समाप्त करने के बजाए बढ़ाते रहे जबकि विश्वविद्यालय के परिनियमों में उनको ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। इस पर अदालत ने कुलपति को बार अपना पक्ष रखने का मौका दिया था मगर उनकी ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया इसलिए उनको व्यक्तिगत रूप से 21 अगस्त को हाजिर होने के लिए कहा गया है।
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