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एलटी ग्रेड के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति फंसी
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यूपीपीएससी ने एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के तहत 13 विषयों का रिजल्ट जारी किया और चयनित अभ्यर्थियों के अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी कर दी, लेकिन आयोग की एक टिप्पणी से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटक गई। शिक्षा निदेशालय माध्यमिक इस तैयारी में है कि अभ्यर्थियों की मार्कशीट, डिग्री आदि का सत्यापन कराने के बाद ही उन्हें नियुक्ति दी जाए, जबकि अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि अन्य भर्ती परीक्षाओं की तरह एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों को भी पहले नियुक्ति दी जाए और इसके बाद सत्यापन कराया जाए। इस मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने बृहस्पतिवार को शिक्षा निदेशालय में ज्ञापन भी सौंपा।
एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के तहत 15 विषयों में कुल 10768 पदों पर भर्ती होनी है। इनमें से 13 विषयों का रिजल्ट जारी किया जा चुका है, जबकि दो विषयों हिंदी और सामाजिक विज्ञान का परिणाम पेपर लीक के विवाद में फंसा हुआ है। आयोग की ओर से 13 विषयों में चयनित 4244 अभ्यर्थियों के अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और निदेशालय को नियुक्ति की संस्तुति भी भेजी जा चुकी है। संस्तुति के साथ आयोग ने यह टिप्पणी भी कर दी है कि इन अभ्यर्थियों की डिग्री एवं मार्कशीट का सत्यापन कराने के बाद ही इन्हें नियुक्ति दी जाए और यही टिप्पणी अभ्यर्थियों की नियुक्ति में बाधा बन गई है।
अमूमन परिषदीय विद्यालयों, अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के तहत काउंसलिंग कराकर नियुक्ति दे दी जाती है और अभ्यर्थियों से उनके मूल अभिलेख जमा करा लिए जाते हैं। इसके बाद मार्कशीट एवं डिग्री का यूपी बोर्ड या अन्य संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालयों से सत्यापन कराया जाता हे। इस प्रक्रिया में पांच से छह माह का वक्त लगता है और सत्यापन पूरा होते ही अभ्यर्थियों के मूल अभिलेख वापस कर दिए जाते हैं, लेकिन एटी ग्रेड अभ्यर्थियों के मामले में पेच फंस गया है। इस मसले पर एलटी समर्थक मोर्चा के संयोजन विक्की खान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक (राजकीय) अंजना गोयल से मुलाकात की और मांग की कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के बाद मार्कशीट एवं डिग्री का सत्यापन कराया जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर पहले सत्यापन कराया गया तो उन्हें नियुक्ति के लिए पांच से छह माह तक इंतजार करना पड़ेगा। अभ्यर्थियों ने इस बात पर भी आपत्ति दर्ज कराई कि आयोग को केवल परीक्षा कराने और रिजल्ट जारी करने का अधिकार है। नियुक्ति की प्रक्रिया पर आयोग टिप्पणी नहीं कर सकता है। अभ्यर्थियों ने मांग उठाई कि अन्य भर्ती संस्थाओं और पूर्व से लागू व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों को नियुक्ति देकर सत्यापन कराया जाए। अपर शिक्षा निदेशक ने आश्वासन दिया कि जो कुछ होगा, वह अभ्यर्थियों के हित में होगा।
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सत्यापन के लिए निदेशालय के पास बजट नहीं
एलटी समर्थक मोर्चा के संयोजक विक्की खान का कहना है कि अगर शिक्षा निदेशालय नियुक्ति से पहले सत्यापन कराता है तो इसके लिए उसे बजट की जरूरत होगी, क्योंकि सत्यापन की प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होता है। इसके लिए लाखों रुपये चाहिए और निदेशालय के अफसरों के अनुसार इस मद में अलग से कोई बजट भी नहीं है। वहीं, नियुक्ति के बाद विद्यालयों के स्तर से सत्यापन कराया जाता है और शुल्क संबंधित अभ्यर्थी से लिया जाता है। ऐसे में निदेशालय के लिए अपने स्तर से सत्यापन कराने में भी पेच फंस रहा है।
नियुक्ति के लिए शासन से मांगी गई अनुमति
शिक्षा निदेशालय में ज्ञापन देने गए अभ्यर्थियों को बताया गया कि इस बारे में शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है और नियुक्ति प्रक्रिया के बाद मार्कशीट एवं डिग्री का सत्यापन कराए जाने के लिए अनुमति मांगी गई है। अब शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
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एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के तहत 15 विषयों में कुल 10768 पदों पर भर्ती होनी है। इनमें से 13 विषयों का रिजल्ट जारी किया जा चुका है, जबकि दो विषयों हिंदी और सामाजिक विज्ञान का परिणाम पेपर लीक के विवाद में फंसा हुआ है। आयोग की ओर से 13 विषयों में चयनित 4244 अभ्यर्थियों के अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और निदेशालय को नियुक्ति की संस्तुति भी भेजी जा चुकी है। संस्तुति के साथ आयोग ने यह टिप्पणी भी कर दी है कि इन अभ्यर्थियों की डिग्री एवं मार्कशीट का सत्यापन कराने के बाद ही इन्हें नियुक्ति दी जाए और यही टिप्पणी अभ्यर्थियों की नियुक्ति में बाधा बन गई है।
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अमूमन परिषदीय विद्यालयों, अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के तहत काउंसलिंग कराकर नियुक्ति दे दी जाती है और अभ्यर्थियों से उनके मूल अभिलेख जमा करा लिए जाते हैं। इसके बाद मार्कशीट एवं डिग्री का यूपी बोर्ड या अन्य संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालयों से सत्यापन कराया जाता हे। इस प्रक्रिया में पांच से छह माह का वक्त लगता है और सत्यापन पूरा होते ही अभ्यर्थियों के मूल अभिलेख वापस कर दिए जाते हैं, लेकिन एटी ग्रेड अभ्यर्थियों के मामले में पेच फंस गया है। इस मसले पर एलटी समर्थक मोर्चा के संयोजन विक्की खान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक (राजकीय) अंजना गोयल से मुलाकात की और मांग की कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के बाद मार्कशीट एवं डिग्री का सत्यापन कराया जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर पहले सत्यापन कराया गया तो उन्हें नियुक्ति के लिए पांच से छह माह तक इंतजार करना पड़ेगा। अभ्यर्थियों ने इस बात पर भी आपत्ति दर्ज कराई कि आयोग को केवल परीक्षा कराने और रिजल्ट जारी करने का अधिकार है। नियुक्ति की प्रक्रिया पर आयोग टिप्पणी नहीं कर सकता है। अभ्यर्थियों ने मांग उठाई कि अन्य भर्ती संस्थाओं और पूर्व से लागू व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों को नियुक्ति देकर सत्यापन कराया जाए। अपर शिक्षा निदेशक ने आश्वासन दिया कि जो कुछ होगा, वह अभ्यर्थियों के हित में होगा।
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सत्यापन के लिए निदेशालय के पास बजट नहीं
एलटी समर्थक मोर्चा के संयोजक विक्की खान का कहना है कि अगर शिक्षा निदेशालय नियुक्ति से पहले सत्यापन कराता है तो इसके लिए उसे बजट की जरूरत होगी, क्योंकि सत्यापन की प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होता है। इसके लिए लाखों रुपये चाहिए और निदेशालय के अफसरों के अनुसार इस मद में अलग से कोई बजट भी नहीं है। वहीं, नियुक्ति के बाद विद्यालयों के स्तर से सत्यापन कराया जाता है और शुल्क संबंधित अभ्यर्थी से लिया जाता है। ऐसे में निदेशालय के लिए अपने स्तर से सत्यापन कराने में भी पेच फंस रहा है।
नियुक्ति के लिए शासन से मांगी गई अनुमति
शिक्षा निदेशालय में ज्ञापन देने गए अभ्यर्थियों को बताया गया कि इस बारे में शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया गया है और नियुक्ति प्रक्रिया के बाद मार्कशीट एवं डिग्री का सत्यापन कराए जाने के लिए अनुमति मांगी गई है। अब शासन से मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है।