फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Appointment of assistant teacher on compassionate grounds is unconstitutional

UP : अनुकंपा के आधार पर सहायक अध्यापक की नियुक्ति असांविधानिक, सरकार के शासनादेशों को हाईकोर्ट ने किया रद्द

Sat, 19 Apr 2025 01:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 19 Apr 2025 01:24 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित प्रदेश सरकार के शासनादेशों को स्वत: संज्ञान लेते हुए रद्द कर दिया है। कहा कि यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई अधिनियम) के प्रावधानों का उल्लंघन है।

विज्ञापन
Appointment of assistant teacher on compassionate grounds is unconstitutional
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित प्रदेश सरकार के शासनादेशों को स्वत: संज्ञान लेते हुए रद्द कर दिया है। कहा कि यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई अधिनियम) के प्रावधानों का उल्लंघन है। यह असांविधानिक है।

विज्ञापन


यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत ने शैलेंद्र कुमार की याचिका पर दिया है। याची ने वर्ष 2000 और 2013 के शासनादेशों के आधार पर सहायक अध्यापक के रूप में अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति सार्वजनिक भर्ती, पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से ही की जा सकती है। दोनों शासनादेश संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21-ए के विपरीत हैं।
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा, दोनों शासनादेश शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 3 का उल्लंघन करते हैं, जो बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करती है। फैसले में कहा कि इसके विपरीत, अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति में कुछ चुनिंदा लोग ही प्रवेश कर पाते हैं। ऐसी प्रक्रिया में आम जनता की भागीदारी नहीं होती।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रतिस्पर्धी योग्यता के आधार पर चयन सुनिश्चित करता है कि सबसे योग्य उम्मीदवार ही शिक्षक के रूप में नियुक्त हों। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बच्चों के अधिकारों को सफलतापूर्वक महसूस किया जाए। कोर्ट ने आगे कहा, दोनों शासनादेश डाइंग इन हार्नेस रूल्स, 1999 के नियम 5 के कानून के विपरीत हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत बच्चों के मौलिक अधिकार को साकार करना है तो दोषपूर्ण नियुक्ति प्रक्रियाओं के कारण शिक्षकों की गुणवत्ता में गिरावट और इसके परिणामस्वरूप शिक्षण के मानक में गिरावट बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed