फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Annual Convention of NASI concept of self-reliant India is unimaginable without science

नासी का वार्षिक अधिवेशन : विज्ञान के बिना आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना अकल्पनीय

Sun, 04 Dec 2022 11:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 04 Dec 2022 11:24 PM IST
सार

तीन दिवसीय अधिवेशन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन रविवार को डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की अध्यक्ष प्रो. मंजू शर्मा ने कहा कि विज्ञान के बिना आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना अकल्पनीय है।

विज्ञापन
Annual Convention of NASI concept of self-reliant India is unimaginable without science
Prayagraj News : नासी की बैठक में मौजूद वैज्ञानिक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आर्थिक रूप से सक्षम भारत के लिए विज्ञान शिक्षा, कृषि एवं मानव जीवन के उत्तम स्वास्थ्य ध्यान देना होगा। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों को एकजुट करके इस काम को सहज बनाया जा सकता है। यह बात भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी) के 92वें वार्षिक अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि कही।

विज्ञापन



तीन दिवसीय अधिवेशन एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के पहले दिन रविवार को डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की अध्यक्ष प्रो. मंजू शर्मा ने कहा कि विज्ञान के बिना आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना अकल्पनीय है। अगर हमें अपने देश को उन्नति के शिखर पर ले जाना है तो विज्ञान को शोध की दिशा में बढ़ावा देना ही होगा। नासी के अध्यक्ष प्रो. अजय घटक ने कहा कि हमें विज्ञान शिक्षा के लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए प्रेरित करना चाहिए।

विज्ञापन

इससे पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. अजय कुमार सूद एवं विशिष्ट अतिथि प्रो. गोविंद राजन पद्मनाभन, आईआईटी मुंबई के प्रो. जयेश आर. बेलारे आदि ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। उद्घाटन सत्र के बाद वैज्ञानिकों ने अपने शोधपत्र भी पढ़े। खाद्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य देखभाल पर आधारित प्रो. अशोक कुमार सिंह एवं प्रो. अश्विनी पारीक के व्याख्यान से श्रोताओं को विस्तृत जानकारी मिली। 


आईसीएमआर के महानिदेशक प्रो. बलराम भार्गव की अध्यक्षता एवं प्रो. निखिल टंडन की सह अध्यक्षता में प्रो. अमित घोष का एंटीबायोटिक पर एवं प्रो. शिव शारिन का फैटी लिवर पर व्याख्यान जनोपयोगी रहा। अतिथियों का स्वागत नासी के कार्यकारी सचिव डॉ. नीरज कुमार और धन्यवाद ज्ञापन साइंस फैकल्टी बीएचयू की डीन प्रो. मधुलिका अग्रवाल ने किया।

कंप्यूटर और लैपटॉप के अत्यधिक प्रयोग से बचें
शिक्षकों को विज्ञान शिक्षण में पारंगत बनाने के लिए प्रयोगशाला का अधिक से अधिक उपयोग होना चाहिए। साथ ही कंप्यूटर और लैपटॉप के अत्यधिक प्रयोग से बचना चाहिए। यह बात नासी के 92वें वार्षिक अधिवेशन में शामिल होने आए भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर के पूर्व निदेशक पद्म भूषण प्रो. गोविंद राजन पद्मनाभन ने कही।


उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं तकनीकी से सामाजिक क्रांति तभी लाई जा सकती है, जब इसको प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि के क्षेत्र में विज्ञान का समुचित और सही उपयोग किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय वैज्ञानिकों को पोस्ट कोविड प्रभावों की किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए आत्मनिर्भर रहना चाहिए, न कि विदेशी तकनीक  पर निर्भर रहना चाहिए।


प्रो. पद्मनाभन ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमें दवाओं के विकल्प पर जोर देना चाहिए, क्योंकि भारत की तकरीबन 70 फीसदी आबादी अब भी एलोपैथिक दवाओं के विकल्पों से अंजना है। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में जनसंख्या के अनुपात में फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए अनुवांशिक रूप से रूपांतरित जीनोम तकनीक को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed