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अनिरुद्धाचार्य बोले : भटके हिंदुओं की घर वापसी कराना सबसे बड़ी राष्ट्र सेवा, बिना सत्संग के भटक रहे युवा

Sat, 18 Jan 2025 09:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 18 Jan 2025 09:42 PM IST
सार

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि भारत में सबसे अधिक धर्म परिवर्तन हो रहा है। यदि आप अपने सनातन धर्म से प्रेम करते हैं तो महाकुंभ में संकल्प लीजिए कि हम कम से कम एक हिंदू भाई की घर वापसी कराएंगे।

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Aniruddhacharya said: Helping the lost Hindus return home is the biggest national service, youth are wandering
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि भारत में सबसे अधिक धर्म परिवर्तन हो रहा है। यदि आप अपने सनातन धर्म से प्रेम करते हैं तो महाकुंभ में संकल्प लीजिए कि हम कम से कम एक हिंदू भाई की घर वापसी कराएंगे। एक-एक हिंदू अगर अपने भटके भाई को घर वापसी का संकल्प कर लेगा तो यह राष्ट्र की सबसे बड़ी सेवा होगी। सभी को खुश नहीं किया जा सकता है, ऐसा ही सनातन धर्म है। जब मन का नहीं होता है तो लोग निराश हो जाते हैं।

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वह शनिवार को श्री गो गौरी गोपाल सेवा समिति की ओर से आयोजित भागवत कथा में प्रवचन कर रहे थे। स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि जो परीक्षित बनकर भागवत का श्रवण करता है, उसकी 21 पीढि़यों का उद्धार हो जाता है। भागवत नहीं सुनने से समाज में विकृति आ रही है। सत्संग नहीं होने के कारण युवा भटक रहे हैं।

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चाणक्य ने जब चंद्रगुप्त को पढ़ाया तो वह सम्राट बना, ब्राह्मण जब इस देश में पढ़ाता रहा तो शिक्षा का स्तर अलग ही था। आज की शिक्षा ने समाज को नास्तिक बना दिया। जब तुम कम पढ़े लिखे थे तो मां बाप को कांधे पर बिठाकर कांवड़ यात्रा कराते थे। लेकिन, आज जब तुमने ढेर सारी पढ़ाई लिखाई कर ली तो अपने मां बाप को वृद्धाश्रम भेज दिया। यह दोष शिक्षा का है। मैं शिक्षा को खराब नहीं कहता। लेकिन, शिक्षा कैसी होनी चाहिए? जैसी चाणक्य ने चंदग्रुप्त को दी, सांदीपनी ने कृष्ण को दी, वशिष्ठ और विश्वामित्र ने राम को दी और द्रोणाचार्य ने पांडवों को दी। 

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