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निगम को जल्द कागजात उपलब्ध कराएगा आनंद भवन ट्रस्ट

Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 20 Nov 2019 12:27 AM IST
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ANANAD BHAWAN, ALLAHABAD    PHOTO BY:SANJAY BANAUDHA.
ANANAD BHAWAN, ALLAHABAD PHOTO BY:SANJAY BANAUDHA. - फोटो : CITY DESK
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जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक ने कहा, धारा 80 जी के तहत कर में मिली है छूट
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बिल के बारे में ट्रस्ट से जुड़े लोग अनभिज्ञ जबकि, निगम ने कहा हर वर्ष भेजते हैं
आनंद भवन का वार्षिक मूल्यांकन 75 लाख, वर्ष 2014 से लागू है 8.27 लाख गृहकर, 13 वर्ष पुरानी दरों पर भुगतान
प्रयागराज। आनंद भवन, तारामंडल और नेहरू संग्रहालय पर गृहकर के मद में 4.35 करोड़ रुपये बकाया मामले में अब जाकर जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि ने चुप्पी तोड़ी है। ट्रस्ट का कहना है कि धारा 80 जी के तहत कर में छूट मिली है। नगर निगम ने ट्रस्ट संबंधी कागजात मांगे हैं तो वह जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे। वैसे भी तीनों स्थल दर्शनीय हैं, न कि यहां से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं। दूसरी ओर, बकाया गृहकर का नोटिस भेजे जाने से कांग्रेसी काफी नाराज हैं। उनका आरोप है कि सरकार ट्रस्ट पर कब्जे का प्रयास कर रही है।
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू के पैतृक आवास आनंद भवन का वार्षिक मूल्यांकन 75 लाख 18 हजार रुपये है। आनंद भवन का अच्छादित क्षेत्र (कवर्ड एरिया) 25,700 स्क्वायर फीट तथा खुला स्थान (ओपेन एरिया) दो लाख आठ हजार 800 स्क्वायर फीट है। गणना के बाद वर्ष 2014 से इस भवन पर 8.27 लाख गृहकर आरोपित है। यह प्रमुख दर्शनीय स्थल अब नगर निगम के निशाने पर है। प्रशासक को 4.35 करोड़ रुपये बकाया गृहकर जमा करने की नोटिस जारी किया गया है।

नगर निगम के कर विभाग की ओर से कवर्ड एरिया की गणना 2.28 रुपये प्रति वर्ग फीट और ओपेन एरिया की गणना 70 पैसे प्रतिवर्ग फीट की दर से की गई है। 75 लाख 18 हजार रुपये के वार्षिक मूल्यांकन के बारे में आनंद भवन प्रबंधन से जुड़े लोग इससे खुद को अनभिज्ञ बताते हैं। जबकि, नगर निगम के अफसरों का कहना है कि हर वर्ष बिल भेजा जाता है।
ब्याज समेत भारी भरक म बकाया धनराशि के विपरीत जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि की ओर से 13 वर्ष पुरानी दरों के आधार पर सिर्फ 600 रुपये सालाना गृहकर का भुगतान किया जा रहा है। मांग और भुगतान में विसंगति के कारण आनंद भवन, तारामंडल और नेहरू संग्रहालय पर गृहकर के मद में 4.35 करोड़ रुपये बकाया हैं। नोटिस पर ट्रस्ट के प्रशासनिक सचिव ने गृहकर माफी संबंधी पत्र महापौर को दिया है। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी कहा है कि सचिव से चैरीटेबल ट्रस्ट संबंधी दस्तावेज मांगे गए हैं। कागज मिलेंगे तब गृहकर छूट पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
इस पूरे प्रकरण पर जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक डॉ. रवि किरन के मुताबिक, आनंद भवन पर बकाया गृहकर की माफी और भविष्य में इस राष्ट्रीय धरोहर को कर मुक्त करने के लिए जल्द ही ट्रस्ट संबंधी कागजात नगर निगम अफसरों को अनुरोध के साथ उपलब्ध कराए जाएंगे। बताया कि निधि को धारा 80 जी के तहत कर में छूट मिली है। वैसे भी आनंद भवन, संग्रहालय और तारामंडल दर्शनीय स्थल हैं। यहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं होती हैं।
आंशिक भुगतान को नगर निगम ने माना टैक्स देयता है स्वीकार्य
नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके मिश्रा के मुताबिक बकाया धनराशि के विपरीत पुरानी दरों पर छह सौ रुपये वार्षिक गृहकर का भुगतान टैक्स की देयता की स्वीकार्यता है। भुगतान करने वाले को बकाया राशि की भी जानकारी होगी लेकिन इस बारे में कभी कोई प्रत्यावेदन नहीं दिया गया।
प्रमोद तिवारी, अभय अवस्थी ांग्रेसियों का आरोप, आनंद भवन पर कब्जे की साजिश कर रही सरकार
प्रयागराज। आनंद भवन प्रबंधन को 4.35 करोड़ बकाया गृहकर की वसूली नोटिस पर कांग्रेसियों में नाराजगी है। कांग्रेसियों का आरोप है कि सरकार राष्ट्रीय धरोहर और संगम नगरी में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र आनंद भवन पर कब्जे की साजिश रच रही है। नेताओं ने इसे गांधी नेहरू परिवार की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास बताया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश की आजादी में भाजपा का योगदान नगण्य है। वहीं गांधी-नेहरू का योगदान इतिहास में दर्ज है, सरकार इसे बदलना चाहती है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन से आजादी की पूरी लड़ाई का केंद्र बिंदु आनंद भवन रहा है। यह भवन राष्ट्र की धरोहर है, नगर निगम का नोटिस इसकी गरिमा के विपरीत है। हम हक की लड़ाई लडे़ेंगे। उन्होंने बताया कि गृहकर माफी के लिए महापौर से वार्ता हुई है। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अभय अवस्थी ‘बाबा’का कहना है कि आनंद भवन को करोड़ों के बकाए का नोटिस जारी करना सरकार की मंशा को स्पष्ट कर रहा है। रखरखाव के नाम पर लाल किला जैसी ऐतिहासिक स्थल को निजी हाथों में दे दिया गया। धरोहरों पर सरकार की नजर है। जलियांवाला बाग ट्रस्ट का मामला इसका ताजा उदाहरण है। इस तर्ज पर आनंद भवन पर आधिपत्य के प्रयास सफल नहीं हो पाएंगे। हम कांग्रेसी इसका पुरजोर विरोध करेंगे। इस धरोहर को कर मुक्त कराने की हर औपचारिकता पूरी की जाएगी।
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