फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Amba ji Mandir: A fight broke out over property in Juna Akhara, Mahant Hari Giri and former MP Mahesh Giri

Amba ji Mandir : जूना अखाड़े में संपत्ति को लेकर छिड़ा घमासान, महंत हरि गिरि-पूर्व सांसद महेश गिरि आमने-सामने

Sun, 01 Dec 2024 01:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 01 Dec 2024 01:23 PM IST
सार

महंत तनसुख गिरि बापू 18 नवंबर की रात ब्रह्मलीन हो गए थे। इसके बाद मंदिर की गद्दी के स्वामित्व का विवाद खड़ा हो गया है। गुजरात के सिद्धपीठ अंबाजी मंदिर के महंत रहे स्वामी अंबाजी तनसुख गिरि के शिष्य महेश गिरि ने हरि गिरि पर मठ की संपत्ति पर कब्जा कराने का आरोप लगाया।

विज्ञापन
Amba ji Mandir: A fight broke out over property in Juna Akhara, Mahant Hari Giri and former MP Mahesh Giri
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरि महाराज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गिरनार (गुजरात) स्थित अंबाजी मंदिर के श्रीमहंत तनसुख गिरि बापू महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद गद्दी के स्वामित्व को लेकर जूना अखाड़े के संतों में घमासान मच गया है। मामले में भाजपा के पूर्व सांसद महेश गिरि बापू और जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरि आमने-सामने आ गए हैं। महंत महेश गिरि ने हरि गिरि को मठों-मंदिरों का सबसे बड़ा घोटालेबाज करार देते हुए उनकी जांच के लिए आवाज उठाई है।

विज्ञापन

इस विवाद के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद महंत हरि गिरि के बचाव में उतर आया है। परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी का कहना है कि महेश गिरि बापू को अपनी हद में रहना चाहिए। अगर वह महंत हरि गिरि को धमकी देंगे या बदनाम करने की कोशिश करेंगे तो संत गुजरात कूच पर विचार करेंगे। महंत तनसुख गिरि बापू 18 नवंबर की रात ब्रह्मलीन हो गए थे। इसके बाद मंदिर की गद्दी के स्वामित्व का विवाद खड़ा हो गया है। गुजरात के सिद्धपीठ अंबाजी मंदिर के महंत रहे स्वामी अंबाजी तनसुख गिरि के शिष्य महेश गिरि ने हरि गिरि पर मठ की संपत्ति पर कब्जा कराने का आरोप लगाया।

विज्ञापन

महेश गिरि का कहना है कि उनके गुरु के ब्रह्मलीन होने के दूसरे दिन ही आनन-फानन महंत प्रेम गिरि की चादर विधि कर दी गई, जबकि धूल रोट तीसरे दिन करने का विधान है। दूसरे दिन ही धूल रोट कर संन्यास परंपरा के खिलाफ कार्य किया गया। महंत महेश गिरि का कहना है कि यदि चादर विधि करनी ही थी तो कम से कम षोडशी का तो इंतजार किया गया होता। अमूमन षोडशी के दिन ही उत्तराधिकारी की घोषणा या चादर विधि की जाती है।

महेश गिरि बापू का कहना है कि श्रीमहंत अंबाजी तनसुख गिरि महाराज उनके चोटी गुरु थे। उनके मठ पर यदि कोई दावा पेश नहीं करता है तो वह अपना दावा करेंगे। सरकार इस मामले की जांच कराए, जो सही हो उसी की चादर विधि होनी चाहिए। श्रीमहंत हरि गिरि महाराज पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार महंत हरि गिरि महाराज के कारनामों की जांच कराए तो वह देश के सबसे बड़े घोटालेबाज साबित होंगे। महंत हरि गिरि और महंत प्रेम गिरि की ओर से जो भी किया जा रहा है वह असांविधानिक है। नियम के खिलाफ कार्यों का विरोध किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed