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श्रीनगर बवाल में फंसे शहर के अमरनाथ यात्री वापस लौटे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 12 Jul 2016 02:19 AM IST
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आतंकी कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में उपजे बवाल में अमरनाथ यात्रा पर गए शहर के तमाम यात्री भी फंस गए थे। सोमवार शाम को सुरक्षित घर पहुंचने के बाद इन लोगों ने अमर उजाला को फोनकर बताया कि वे एक दिन तक श्रीनगर के होटल में फंसे रहे। दूसरे दिन सुबह जैसे ही वाहन में बैठकर निकले उपद्रवियों ने गाड़ियों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। यह देखकर पहले तो यात्री सहमे में लेकिन कुछ पल में सुरक्षाबलों ने उपद्रवियों को खदेड़ दिया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यात्रियों जंक्शन तक छोड़ा गया।
होलागढ़ के चांटी गांव के वकील अंकित शुक्ला 1 जुलाई को इलाहाबाद, प्रतापगढ़ जिले के 32 लोगों के साथ अमरनाथ यात्रा पर गए। 6 जुलाई को पहलगाम से अमरनाथ बाबा के दर्शन के लिए रवाना हुए। 8 जुलाई को बाल्टाल से श्रीनगर पहुंचे। श्रीनगर पहुंचने पर पता चला कि आतंकी बुरहान वानी की मौत से भारी बवाल हो रहा है। 9 जुलाई को पूरे दिन होटल से बाहर नहीं निकले। रविवार सुबह जैसे ही वे बाहर से निकले। उनकी विंगर गाड़ी पर उपद्रवियों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। सुरक्षा बलों ने चारों ओर से घेर जवाबी कार्रवाई की तो यात्रियों ने भी वंदे मातरम और भारत की माता की जय के नारे लगाकर जवानों का हौसला बढ़ाया। आखिरकार यात्रियों को सुरक्षा घेरे में जंक्शन के लिए रवाना किया गया। अंकित शुक्ला ने बताया कि रास्ते भर में सन्नाटा रहा। सड़क पर सिर्फ सशस्त्र बल के जवान नजर आ रहे थे। धूमनगंज के कृष्णदीप मिश्र, होलागढ़ के रामशेर मिश्र, प्रतापगढ़ के अजय पांडेय, ममफोर्डगंज श्रीश तिवारी समेत अन्य का कहना था कि बवाल में फंसने पर उन्हें डर तो लग रहा था कि लेकिन उन्हें जवानों पर पूरा भरोसा था कि वे उन्हें सुरक्षित पहुंचाएंगे।
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होलागढ़ के चांटी गांव के वकील अंकित शुक्ला 1 जुलाई को इलाहाबाद, प्रतापगढ़ जिले के 32 लोगों के साथ अमरनाथ यात्रा पर गए। 6 जुलाई को पहलगाम से अमरनाथ बाबा के दर्शन के लिए रवाना हुए। 8 जुलाई को बाल्टाल से श्रीनगर पहुंचे। श्रीनगर पहुंचने पर पता चला कि आतंकी बुरहान वानी की मौत से भारी बवाल हो रहा है। 9 जुलाई को पूरे दिन होटल से बाहर नहीं निकले। रविवार सुबह जैसे ही वे बाहर से निकले। उनकी विंगर गाड़ी पर उपद्रवियों ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। सुरक्षा बलों ने चारों ओर से घेर जवाबी कार्रवाई की तो यात्रियों ने भी वंदे मातरम और भारत की माता की जय के नारे लगाकर जवानों का हौसला बढ़ाया। आखिरकार यात्रियों को सुरक्षा घेरे में जंक्शन के लिए रवाना किया गया। अंकित शुक्ला ने बताया कि रास्ते भर में सन्नाटा रहा। सड़क पर सिर्फ सशस्त्र बल के जवान नजर आ रहे थे। धूमनगंज के कृष्णदीप मिश्र, होलागढ़ के रामशेर मिश्र, प्रतापगढ़ के अजय पांडेय, ममफोर्डगंज श्रीश तिवारी समेत अन्य का कहना था कि बवाल में फंसने पर उन्हें डर तो लग रहा था कि लेकिन उन्हें जवानों पर पूरा भरोसा था कि वे उन्हें सुरक्षित पहुंचाएंगे।
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