अमर उजाला अभियान : अभिभावकों की जेब पर नहीं बढ़ेगा बोझ, स्कूलों में बुक बैंक है न
नए सत्र से विद्यालयों में ऑफलाइन पढ़ाई होगी। ऐसे में विद्यालय प्रबंधन ने एक अनूठी पहल की है। वह विद्यार्थियों से अपील कर रहे हैं कि अपनी पुरानी कक्षा की पुस्तके स्कूल के बैंक में जमा कर दें। ताकि उन्हें अगली कक्षा की पुस्तक मिल सके और उनकी पुस्तक से दूसरे बच्चों की मदद हो सके।
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कोरोना काल में सबसे अधिक मार अर्थव्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र पर पड़ी। तमाम लोगों को नौकरी चली, कुछ व्यवसाय बंद होने के कगार पर आ गया। अब जबकि संक्रमण की रफ्तार थमी है तो सबकुछ पटरी पर लौट रहा है। स्कूल-कॉलेज भी खुल गए हैं।
नए सत्र से विद्यालयों में ऑफलाइन पढ़ाई होगी। ऐसे में विद्यालय प्रबंधन ने एक अनूठी पहल की है। वह विद्यार्थियों से अपील कर रहे हैं कि अपनी पुरानी कक्षा की पुस्तके स्कूल के बैंक में जमा कर दें। ताकि उन्हें अगली कक्षा की पुस्तक मिल सके और उनकी पुस्तक से दूसरे बच्चों की मदद हो सके।
सेंट मेरीज कॉन्वेंट (एसएमसी) की प्रधानाचार्य सिस्टर ज्योति ने बताया कि सभी बच्चों के अभिभावकों को इस संबंध में मैसेज किया गया है। वह अपने बच्चे की पुस्तकें स्कूल के बुक बैंक में जमा कर दें। अगर उन्हें अपने बच्चे के लिए पुस्तक की जरूरत है तो उनके बच्चें को भी बुक बैंक से किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। उनका कहना है कि अभिभावकों पर पुस्तक खरीदने का अतिरिक्त बोझ न पड़े। इसके लिए विद्यालय ने बुक बैंक के नाम से एक पहल शुरू की है। अभिभावक और बच्चे इसमें काफी सहयोग कर रहें।
बच्चों में मदद की भावना को आगे बढ़ाने के लिए चलाई मुहिम
गंगा गुरुकुलम विद्या मंदिर फाफामऊ की प्रधानाचार्य अल्पना डे ने बताया कि उनके स्कूल में भी बुक बैंक की मुहिम चल रही है। इससे बच्चों में एक दूसरे की मदद की भावना जागृत होती है। सभी बच्चों को इसके लिए प्रेरित किया जाता है कि वह अपनी पुरानी पुस्तकें जमा कर दें। ताकि उनके पुस्तके आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दी जा सकें। ताकि वह भी पढ़ाई कर सकें। इससे उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पढ़ेगा। पुस्तक जमा करने वाला बच्चा भी अगर अपनी नई कक्षा के लिए पुस्तक लेना चाहता है तो उसे भी पुस्तकें प्रदान की जाती है।
खुद से आगे आते हैं बच्चे और अभिभावक
ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विक्रम बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि उनके विद्यालय में भी बुक बैंक की व्यवस्था है। वह भी नई कक्षा में जाने वाले बच्चों को अधिक से अधिक पुस्तकें बुक बैंक में जमा करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस बुक बैंक की मुहिम हर बच्चे की मदद हो जाती है। यह पूरी तरह से अभिभावकों और बच्चों की स्वेच्छा पर है। इसके लिए उनपर कोई दबाव नहीं बनाया जाता है।
आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों का बोझ हो जाता है कम
रानी रेवती देवी विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के शिक्षक मनोज गुप्ता ने बताया कि उनके यहां भी बुक बैंक चलता है। परिणाम आने के बाद बच्चों को प्रेरित किया जाता है कि वह कक्षा अध्यापक के पास पुरानी पुस्तकें जमा कर दें। नई कक्षा के अध्यापक से अगर पुस्तक चाहिए तो बता दें। उन्हें भी पुस्तक मिल जाती है। इस अभियान से एक दूसरे की मदद हो जाती है। आर्थिक रूप कमजोर अभिभावकों पर बच्चों की पुस्तक खरीदने का बोझ नहीं पड़ता है।