इनामी होगा डॉ. बंसल की हत्या करवाने वाला आलोक सिन्हा, एसटीएफ की टीमें कर रहीं तलाश
- एडमिशन माफिया आलोक सिन्हा ने डॉ. बंसल की हत्या करवाई और उसके बाद से ही फरार हो गया
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डॉ. बंसल की हत्या करवाने वाला आलोक सिन्हा गिरफ्तार न हुआ तो उस पर शासन जल्द ही इनाम घोषित कर सकता है। एसटीएफ प्रयागराज और लखनऊ की दो टीमों को उसकी गिरफ्तारी के लिए लगाया गया है। एक टीम ने नोएडा और गाजियाबाद में दबिश देकर कई लोगों से पूछताछ भी की है। आलोक सिन्हा का पिछले चार सालों से कोई पता नहीं है।आलोक के साथ उसके परिजन भी लापता हैं। संभवत: वह कहीं गुमनामी में परिवार के साथ रह रहा है।
मूल रूप से पटना का रहने वाले एडमिशन माफिया आलोक सिन्हा ने डॉ. बंसल की हत्या करवाई और उसके बाद से ही फरार हो गया। हत्या वाली तारीख के बाद से उसका कुछ पता नहीं चला है। घटना से बाद से उसका मोबाइल भी बंद है। डिप्टी एसपी एसटीएफ नवेंदु सिंह ने बताया कि आलोक की तलाश के लिए प्रयागराज और लखनऊ दोनों यूनिट की टीमें बनाई गई हैं।
पुलिस आलोक के पुराने मोबाइल नंबर के आधार पर उसके परिचितों, दोस्तों और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी हासिल करेगी। फिलहाल बंसल के मर्डर के बाद से ही आलोक का कुछ पता नहीं है, न ही उसने मोबाइल खोला है। हो सकता है कि वह दूसरा मोबाइल प्रयोग कर रहा हो। पुलिस की एक टीम जल्द ही पटना स्थित उसके घर जाएगी और पता लगाएगी कि वह अंतिम बार गांव कब गया था?
आलोक ने गाजियाबाद में ऑफिस खोला था और नोएडा में रहता था। जल्द ही पुलिस दोनों जगहों पर दबिश दे सकती है। उसके आफिस में काम करने वालों और पास पड़ोस में रहने वालों से भी उसके बारे में पूछताछ की जाएगी। अगर वह नहीं मिला तो विवेचक उस पर इनाम के लिए शासन को संस्तुति करेगा और वह इनामी घोषित हो जाएगा। आलोक ही नहीं इस मामले में फरार अन्य शूटरों पर भी जल्द ही इनाम घोषित किया जा सकता है।
आलोक के नेपाल कनेक्शन की जांच होगी
अब तक की जांच में सामने आया है कि आलोक की तमाम मेडिकल कॉलेजों में अंदर तक सेटिंग थी। दाखिले के नाम पर वह करोड़ों का वारा न्यारा भी कर चुका था। सिर्फ देश ही नहीं, उसका नेपाल के कुछ मेडिकल कालेजों से भी संपर्क था। उसकी पहुंच देखकर ही डॉ. बंसल ने 55 लाख रुपये दे दिए। इन्हीं 55 लाख रुपयों के कारण आलोक ने बंसल की हत्या करवा दी। अब जबकि वह कई सालों से लापता है तो पुलिस अब उसके नेपाल कनेक्शन की भी जांच करेगी। इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि वह नाम बदलकर परिवार वालों के साथ नेपाल में ही रह रहा हो। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि नेपाल कनेक्शन के बारे में टीम खोजबीन कर रही है। उसे ढूंढने के लिए वहां की पुलिस की भी मदद ली जाएगी।
बंसल हत्याकांड की एफआईआर में चार साल बाद हुई नामजदगी
डॉ. बंसल की हत्या को चार साल हो गए, मामले में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके बाद से न जाने कितने विवेचक बदल गए, लेकिन एफआईआर में नामजदगी नहीं हो पाई थी। नामजदगी के कॉलम में चार साल से अधिक समय तक अज्ञात लिखा रहा। लखनऊ एसटीएफ के इंस्पेक्टर हेमंत भूषण और उनकी टीम ने सोमवार को बंसल की हत्या करने वाले शोएब को गिरफ्तार किया। इसके बाद मंगलवार को आलोक सिन्हा, दिलीप समेत समेत सात लोगों को नामजद कर लिया गया।बंसल हत्याकांड की एफआईआर 12 जनवरी 2017 को कीडगंज थाने में दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में किसी का नाम नहीं था। अज्ञात शूटरों द्वारा हत्या की बात लिखी गई थी। इसके बाद जांच होती रही, विवेचक बदलते रहे, लेकिन नामजदगी नहीं हो पाई। इस दौरान पुलिस ने तकरीबन डेढ़ सौ से अधिक लोगों के बयान भी दर्ज किए। पुलिस ने हर जतन कर डाला, लेकिन प्रदेश के इस सनसनीखेज कांड पर चार साल तक पर्दा पड़ा रहा। एसटीएफ के खुलासे के बाद मंगलवार को कीडगंज पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को नामजद कर दिया।
आलोक सिन्हा, दिलीप मिश्रा, अख्तर कटरा और अबरार मुल्ला को साजिशकर्ता के रूप में और शोएब, यासिर और मकसूद उर्फ जैद को शूटरों के तौर पर नामजद किया गया। इनमें से यासिर की मौत हो चुकी है। उसकी हत्या उसी के साथियों शोएब और मकसूद ने पैसों के बंटवारे के विवाद में कर दी थी। अख्तर कटरा और दिलीप मिश्रा इस समय जेल में हैं। शोएब पकड़ा जा चुका है। अब पुलिस आलोक, अबरार और मकसूद की तलाश करेगी। कीडगंज पुलिस वारंट बी पर लखनऊ में गिरफ्तार आरोपी शोेएब को पूछताछ के लिए प्रयागराज लाने की तैयारी कर रही है।