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वाराणसी में ऐतिहासिक धरोहरों के मरम्मत की अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 29 Apr 2016 01:44 AM IST
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वाराणसी
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के गंगा घाटों पर स्थित ऐतिहासिक इमारतों के मरम्मत पर लगी रोक हाईकोर्ट ने उठा ली है। कोर्ट ने जर्जर भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग को सशर्त अनुमति देते हुए कहा है कि भवनों का मौलिक और ऐतिहासिक स्वरूप परिवर्तित नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने नए भवनों के निर्माण पर रोक का आदेश जारी रखा है।
कौटिल्य सोसाइटी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खंडपीठ ने इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग के लिए रामनगर में जेटी के निर्माण की इजाजत दे दी है। याचिका में राज्य सरकार ने अर्जी दाखिल कर पांच नए घाट बनाने और पुराने घाटों की मरम्मत की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दस सदस्यों की समिति गठित है। सरकार अपना प्रस्ताव कमेटी के समक्ष रखे और कमेटी 15 दिन के भीतर बैठक घाटों की मरम्मत के बारे में अनुमति देने पर निर्णय ले। नए घाटों के निर्माण पर कमेटी जो भी निर्णय लेती है, उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंपनी होगी।
मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि घाटों पर स्थित पुराने भवन बेहद जर्जर हो चुके हैं। उनकी मरम्मत न होने से गिरने का खतरा है, जिससे दुघर्टना हो सकती है। वीडीए ने ऐसे भवनों का बिना नक्शा पास कराए मरम्मत की स्वीकृति देने संबंधी प्रस्ताव को शासन ने अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि भवनों की वास्तुकला और प्राचीन स्वरूप को बरकरार रखते हुए ही मरम्मत की जा सकती है। मगर किसी भी हाल में नए भवन का निर्माण नहीं किया जाएगा। मरम्मत कार्य की निगरानी वीडीए करेगा। न्यायमित्र मनीष गोयल ने कोर्ट के आदेश अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में अस्सी नदी पर अतिक्रमण का भी जिक्र किया गया है।
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अपर सॉलीसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि गंगा में परिवहन शुरू करने और जहाजों से लोडिंग-अनलोडिंग करने के लिए रामनगर में टर्निमल बनाने का प्रस्ताव है। टर्निमल का निर्माण 5.6 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जाएगा। भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 1620 किलोमीटर जल परिवहन होगा। कुल 14 टर्मिनल बनाए जाने हैं। कोलकाता और पटना में टर्मिनल बन चुका है। केंद्र सरकार ने टर्मिनल बनाने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी जिसे कोर्ट ने अससेमेंट रिपोर्ट के आधार पर बनाने की अनुमति प्रदान कर दी है।
अपर सॉलीसिटर जनरल ने बताया कि ऐतिहासिक भवनों की मरम्मत और घाटों के निर्माण की निगरानी के लिए विशेषज्ञ कमेटी गठित कर दी गई है। कोर्ट ने कहा कि घाटों की मरम्मत का काम इसी कमेटी की सलाह से किया जाए। पर्यटन विभाग की विशेष अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल और वीडीए के वकील विवेक वर्मा ने भी इसमें अपना पक्ष रखा। याचिका पर 27 मई को अगली सुनवाई होगी।
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कौटिल्य सोसाइटी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता की खंडपीठ ने इलाहाबाद-हल्दिया जलमार्ग के लिए रामनगर में जेटी के निर्माण की इजाजत दे दी है। याचिका में राज्य सरकार ने अर्जी दाखिल कर पांच नए घाट बनाने और पुराने घाटों की मरम्मत की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दस सदस्यों की समिति गठित है। सरकार अपना प्रस्ताव कमेटी के समक्ष रखे और कमेटी 15 दिन के भीतर बैठक घाटों की मरम्मत के बारे में अनुमति देने पर निर्णय ले। नए घाटों के निर्माण पर कमेटी जो भी निर्णय लेती है, उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंपनी होगी।
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मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि घाटों पर स्थित पुराने भवन बेहद जर्जर हो चुके हैं। उनकी मरम्मत न होने से गिरने का खतरा है, जिससे दुघर्टना हो सकती है। वीडीए ने ऐसे भवनों का बिना नक्शा पास कराए मरम्मत की स्वीकृति देने संबंधी प्रस्ताव को शासन ने अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि भवनों की वास्तुकला और प्राचीन स्वरूप को बरकरार रखते हुए ही मरम्मत की जा सकती है। मगर किसी भी हाल में नए भवन का निर्माण नहीं किया जाएगा। मरम्मत कार्य की निगरानी वीडीए करेगा। न्यायमित्र मनीष गोयल ने कोर्ट के आदेश अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में अस्सी नदी पर अतिक्रमण का भी जिक्र किया गया है।
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अपर सॉलीसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि गंगा में परिवहन शुरू करने और जहाजों से लोडिंग-अनलोडिंग करने के लिए रामनगर में टर्निमल बनाने का प्रस्ताव है। टर्निमल का निर्माण 5.6 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जाएगा। भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। इसके जरिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 1620 किलोमीटर जल परिवहन होगा। कुल 14 टर्मिनल बनाए जाने हैं। कोलकाता और पटना में टर्मिनल बन चुका है। केंद्र सरकार ने टर्मिनल बनाने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी जिसे कोर्ट ने अससेमेंट रिपोर्ट के आधार पर बनाने की अनुमति प्रदान कर दी है।
अपर सॉलीसिटर जनरल ने बताया कि ऐतिहासिक भवनों की मरम्मत और घाटों के निर्माण की निगरानी के लिए विशेषज्ञ कमेटी गठित कर दी गई है। कोर्ट ने कहा कि घाटों की मरम्मत का काम इसी कमेटी की सलाह से किया जाए। पर्यटन विभाग की विशेष अधिवक्ता स्वाती अग्रवाल और वीडीए के वकील विवेक वर्मा ने भी इसमें अपना पक्ष रखा। याचिका पर 27 मई को अगली सुनवाई होगी।