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आरक्षण नियमों का उल्लंघन कर 26 शिक्षकों की नियुक्त का आरोप
Wed, 28 Jul 2021 10:11 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 28 Jul 2021 10:11 PM IST
सार
डिप्टी रजिस्ट्रार ने कुलपति को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया है कि तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव के कार्यकाल में आरक्षण नियमों का उल्लंघन कर 26 शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई। उनका कहना है कि इन शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अभी तक कोई ग्रांट जारी नहीं किया गया। सरकार की ओर से वेतन जारी नहीं होने से विवि इन शिक्षकों के वेतन का भुगतान परीक्षा मद से कर रहा है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : prayagraj
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विस्तार
प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार (प्रशासन) प्रभाष द्विवेदी ने अपने ही संस्थान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डिप्टी रजिस्ट्रार ने गत वर्ष नियुक्त 26 शिक्षकों का वेतन परीक्षा विभाग से दिए जाने पर आपत्ति उठाई है। इस बात को लेकर उन्होंने विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार ने कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार सिंह को पत्र भेजकर जांच की मांग की है।
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डिप्टी रजिस्ट्रार ने कुलपति को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया है कि तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव के कार्यकाल में आरक्षण नियमों का उल्लंघन कर 26 शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई। उनका कहना है कि इन शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अभी तक कोई ग्रांट जारी नहीं किया गया। सरकार की ओर से वेतन जारी नहीं होने से विवि इन शिक्षकों के वेतन का भुगतान परीक्षा मद से कर रहा है। उनका कहना है कि यह वित्तीय नियमों का खुला उल्लंघन है।
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प्रभाष द्विवेदी ने लेखाधिकारी और वित्त अधिकारी पर उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बिना शासन से अनुमति के परीक्षा विभाग के मद से वेतन भुगतान नहीं किया जा सकता। पूर्व में भी तत्कालीन कुलपति से भी शिकायत की गई थी। अब इन शिक्षकों का वेतन रोककर पूर्व में निर्गत वेतन और अन्य भत्तों के कटौती की मांग की है। राज्य विवि के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें अभी कोई पत्र नहीं मिला है। इस बारे में कुछ कहना ठीक नहीं है, पत्र मिलने के बाद प्रकरण की जांच करवाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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