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बीएएलएलबी में सर्वाधिक अंक पाने वाले को मिलेगा गोल्ड मेडल
Thu, 03 Sep 2020 08:14 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 08:14 PM IST
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allahabad university
- फोटो : प्रयागराज
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीएएलएलबी (पांच वर्षीय एलएलबी) में सर्वाधिक अंक पाने वाले मेधावी को गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा। विधि विभाग में हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति सुधीर नारायण की ओर से गोल्ड मेडल देने का निर्णय लिया गया है। न्यायमूर्ति सुधीर नारायण की ओर से विश्वविद्यालय को एक लाख रुपये का ड्राफ्ट सौंपा गया।
न्यायमूर्ति सुधीर नारायण ने 1962 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की थी। उस समय न्सुधीर नारायण का विवि में मेरिट में नौवां स्थान था। इसके साथ इविवि से स्नातक, परास्नातक और चित्रकला विभाग से दो साल का फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा किया। उन्होंने 1963 से 1992 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत किया।
1992 में हाईकोर्ट में न्यायधीश नियुक्ति हुए। 2003 में सेवानिवृत्त हो गए। 2002 में कावेरी जल विवाद प्राधिकरण के सदस्य नियुक्त हुए थे। 2018 में इविवि की ओर से विधि और कला क्षेत्र में उत्कृष्ठता के लिए सम्मानित किए गए। कुलपति प्रो. आरआर तिवारी, रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ल, वित्त अधिकारी एसके मिश्र, चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरके उपाध्याय, डीएसडब्ल्यू प्रो. केपी सिंह, विधि डीन प्रो. आरके चौबे, विभागध्यक्ष प्रो. जेएस सिंह ने न्यायमूर्ति के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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न्यायमूर्ति सुधीर नारायण ने 1962 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की थी। उस समय न्सुधीर नारायण का विवि में मेरिट में नौवां स्थान था। इसके साथ इविवि से स्नातक, परास्नातक और चित्रकला विभाग से दो साल का फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा किया। उन्होंने 1963 से 1992 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत किया।
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1992 में हाईकोर्ट में न्यायधीश नियुक्ति हुए। 2003 में सेवानिवृत्त हो गए। 2002 में कावेरी जल विवाद प्राधिकरण के सदस्य नियुक्त हुए थे। 2018 में इविवि की ओर से विधि और कला क्षेत्र में उत्कृष्ठता के लिए सम्मानित किए गए। कुलपति प्रो. आरआर तिवारी, रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ल, वित्त अधिकारी एसके मिश्र, चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरके उपाध्याय, डीएसडब्ल्यू प्रो. केपी सिंह, विधि डीन प्रो. आरके चौबे, विभागध्यक्ष प्रो. जेएस सिंह ने न्यायमूर्ति के प्रति आभार व्यक्त किया है।
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