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कालखंड में नहीं तिथिवार लिखा जाए इतिहास
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 10 Dec 2016 02:10 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग की ओर से शुक्रवार को ‘न्यू आर्कियोलॉजिकल इनसाइट्स एंड हिस्टॉरिकल पर्सपेक्टिव्स : रिविजिटिंग इंडियाज पास्ट’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने ऐतिहासिक साक्ष्यों के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि इंडियन हिस्ट्री एंड कल्चर सोसाइटी के चेयरपरसन केएन दीक्षित, जेएनयू के प्रोफेसर हरबंस मुखिया ने गोष्ठी के विषय पर चर्चा की। प्रोफेसर हरबंस का कहना था कि इतिहास को प्राचीन, मध्य और आधुनिक कालखंड में बांटना उचित नहीं है। उनका कहना था कि आज जो आधुनिक इतिहास है वह 22वीं और 23वीं शताब्दी में आधुनिक नहीं रह जाएगा। इसलिए इतिहास तिथि के क्रम में लिखा जाना चाहिए।
कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने मध्य कालीन इतिहास के काल विभाजन पर प्रकाश डाला। गोष्ठी को प्रोफेसर केएस मिश्रा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसपी शुक्ल, लखनऊ के प्रोफेसर डीपी तिवारी आदि ने संबोधित किया। संयोजक तथा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पुष्पा तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि विभाग में 2012 के बाद इस तरह का आयोजन हुआ। गोष्ठी में 100 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। संचालन डॉ.गार्गी चटर्जी ने किया।
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कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने मध्य कालीन इतिहास के काल विभाजन पर प्रकाश डाला। गोष्ठी को प्रोफेसर केएस मिश्रा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एसपी शुक्ल, लखनऊ के प्रोफेसर डीपी तिवारी आदि ने संबोधित किया। संयोजक तथा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पुष्पा तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि विभाग में 2012 के बाद इस तरह का आयोजन हुआ। गोष्ठी में 100 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। संचालन डॉ.गार्गी चटर्जी ने किया।
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