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इलाहाबाद विवि : प्रो.रामचंद्र शुक्ल ने बेबाक आलोचना से देश को दिखाई राह, जन्मशती वर्ष पर किए गए याद

Sat, 02 Mar 2024 01:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 02 Mar 2024 01:55 PM IST
सार

विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अजय जैतली ने कहा कि प्रोफेसर शुक्ल भारतीय चित्रकला के परिवेश में ऐसे चिंतनशील कलाकार के रूप में स्थापित रहे जिन्होंने अपनी बेबाक आलोचना से सुविचारित दिशा प्रदान करने का काम किया। साथ ही विश्व की आधुनिक चित्रकला को पुन: परिभाषित किया।

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Allahabad University: Prof. Ramchandra Shukla showed the way to the country with his fearless criticism
इलाहाबाद विवि में प्रो. रामचंद्र शुक्ल जन्मशती समारोह पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद अतिथि। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुराछात्र एवं समीक्षावादी चित्रकला के प्रवर्तक प्रोफेसर रामचंद्र शुक्ल जन्मशती वर्ष शुरू होने के मौके पर दृश्य कला विभाग में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में उनके व्यक्तित्व एवं कला पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम के तहत गोष्ठी एवं परिचर्चा के अलावा प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रोफेसर शुक्ल जन्मशती वर्ष में पूरे वर्ष आयोजन होंगे।

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विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अजय जैतली ने कहा कि प्रोफेसर शुक्ल भारतीय चित्रकला के परिवेश में ऐसे चिंतनशील कलाकार के रूप में स्थापित रहे जिन्होंने अपनी बेबाक आलोचना से सुविचारित दिशा प्रदान करने का काम किया। साथ ही विश्व की आधुनिक चित्रकला को पुन: परिभाषित किया। प्रोफेसर शुक्ल ने अपनी भाषा, कलादृष्टि तथा स्वयं की विकसित लेखन शैली से जगत को ऐसे मुहावरे दिए जिससे कला की दुरुहता सभी के लिए सरल हो गई। प्रोफेसर जैतली ने कहा कि प्रोफेसर शुक्ल का मानना था, पाश्चात्य चित्रकला में समस्टिवादी संवेदना को ग्रहण करने की क्षमता नहीं है। जबकि, भारती चित्रकला मूलत: समष्टिवाद है।
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प्रोफेसर जैतली ने बताया कि प्रोफेसर शुक्ल का जन्म बस्ती के हरैया तहसील के शुक्लपुरा गांव में 1925 में हुआ था। उन्होंने कलागुुरु क्षितींद्र नाथ मजूमदार से शिक्षा ग्रहण की थी। प्रोफेसर शुक्ल ने चित्रकला का रसास्वादन, कला दर्शन आदि पुस्तकें लिखी हैं।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर उत्तमा दीक्षित ने कहा कि प्रोफेसर शुक्ल सिर्फ प्रयागराज के ही नहीं बल्कि बनारस के भी हैं। उनके जन्मशती वर्ष में कुछ कार्यक्रम बनारस में भी होने चाहिए। प्रोफेसर शुक्ल के पुूत्र प्रदीप चंद्र शुक्ल एवं डॉ.आनंद शुक्ल ने पिता के संस्मरण साझा किए। डॉ.ब्रजेश यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर प्रोफेसर अनुपम पांडेय, डॉ.संदीप मेघवाल, डॉ.अदिति पटेल आदि मौजूद रहीं।

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