Allahabad University : फीस वृद्धि के मुद्दे पर उच्चाधिकारियों ने छात्रों के साथ की बैठक
कलेक्ट्रेट के संगम सभागार में हुई बैठक में कमिश्नर विजय विश्वास पंत, डीएम संजय कुमार खत्री, आईजी राकेश सिंह एवं एसएसपी शैलेश पांडेय ने छात्रों से बात की और मुद्दे पर चर्चा की।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में फीस वृद्धि के विरोध में जारी आंदोलन ने इविवि प्रशासन के साथ जिला और पुलिस प्रशासन के लिए भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में जिला एवं पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारियों को इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा। इस मुद्दे पर रविवार को अफसरों ने छात्रों के साथ बैठक की।
कलेक्ट्रेट के संगम सभागार में हुई बैठक में कमिश्नर विजय विश्वास पंत, डीएम संजय कुमार खत्री, आईजी राकेश सिंह एवं एसएसपी शैलेश पांडेय ने छात्रों से बात की और मुद्दे पर चर्चा की। डीएम ने छात्रों से कहा कि चार अक्तूबर को इविवि प्रशासन के साथ छात्रों की वार्ता कराई जाएगी और इसमें जिला एवं पुलिस प्रशासन के अफसर भी मौजूद रहेंगे।
वैसे तो छात्रों ने इविवि से संबंधित कई समस्याएं उठाईं, लेकिन मुख्य मुद्दा फीस वृद्धि रहा। बैठक में शामिल तकरीबन 40 छात्र नेताओं ने एकमत होकर कहा कि फीस वृद्धि वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। इविवि प्रशासन को फीस वृद्धि वापस लेनी होगी। छात्रों ने इसके पीछे तमाम तर्क दिए और कहा कि चार गुना फीस बढ़ोतरी से निम्न आय वर्ग वाले परिवार के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा ग्रहण करना मुश्किल हो जाएगा।
जिला एवं पुलिस प्रशासन के प्रस्ताव को मंजूर करते हुए छात्रों ने कहा कि फीस वृद्धि के मुद्दे पर चार अक्तूबर को इविवि प्रशासन से वार्ता के लिए तैयार हैं। बैठक में संयुक्त संघर्ष समिति के तहत आंदोलन कर रहे सभी छात्र संगठन और एबीवीपी के छात्र नेता शामिल रहे। वहीं, छात्रसंघ भवन के सामने संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले शिव शंकर सरोज एवं विवेक सुल्तानवी का आमरण अनशन जारी रहा।
दो बार हो चुकी है वार्ता की कोशिश
इससे पूर्व इविवि प्रशासन और छात्रों के बीच दो बार वार्ता की कोशिश हुई, लेकिन इसमें कोई न कोई अड़ंगा लग गया। पहली बार इविवि प्रशासन ने यह कहते हुए वार्ता खारिज कर दी कि छात्र नेताओं की ओर से दी गई लिस्ट में विश्वविद्यालय का कोई छात्र नहीं हैं। कोई पूर्व पदाधिकारी तो कोई पूर्व या निलंबित छात्र है। दूसरी बार कोशिश हुई तो कुछ छात्र नेताओं को वार्ता में शामिल नहीं होने दिया और हंगामे के कारण वार्ता स्थगित कर दी गई।