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कॉलेजों में सीट भरने की होगी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 08 Jan 2017 01:46 AM IST
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इविवि में निदेशकों की नियुक्ति के साथ दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम जारी होने की उम्मीद है लेकिन कालेजों में सीट भरना इस बार भी बड़ी चुनौती होगी। कई कॉलेजों में तो बीए की तकरीबन 50 फीसदी सीट खाली रह गई। राजर्षि टंडन महिला महाविद्यालय में तो वर्तमान सत्र के लिए 20 से भी कम छात्राओं ने प्रवेश लिया है। इस स्थिति का कारण जानने तथा सुधार के लिए विश्वविद्यालय की ओर से कमेटी भी बनाई गई है। गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रवेश परीक्षा में शून्य से भी कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया। इसके बावजूद ये हालात हैं। ऐसे में बीए की प्रवेश परीक्षा भी सवाल खड़ा हो गया है।
विश्वविद्यालय और कॉलेजों में बीए की सीट खाली रह जाने की समस्या विगत कई वर्षों से है। सबसे बड़े कालेज सीएमपी में बीए की कुल 2880 सीट है। इस साल 2250 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिए। इससे पूर्व के वर्षों में तो प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की दो हजार से भी कम रही। इलाहाबाद डिग्री कालेज में भी 1800 सीट है लेकिन वहां भी तकरीबन 700 सीट खाली रह गई। शून्य अंक पर प्रवेश लेने के बावजूद विद्यार्थी नहीं आए। ईश्वर शरण में स्वीकृत 1500 में से 1250 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी में बीए प्रथम वर्ष कुल 300 विद्यार्थी हैं। जबकि स्वीकृत सीट की संख्या 370 है। अन्य कालेजों में भी यही स्थिति है। अध्यापक इस स्थिति के लिए छात्र-छात्राओं में बीए के प्रति रुझान कम होने के साथ विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया में देरी को भी बड़ा कारण मानते हैं। हालांकि, इस बार समय से दाखिला होने की उम्मीद है लेकिन विश्वविद्यालय और कालेजों के सामने सीट भरने की चुनौती होगी।
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विश्वविद्यालय और कॉलेजों में बीए की सीट खाली रह जाने की समस्या विगत कई वर्षों से है। सबसे बड़े कालेज सीएमपी में बीए की कुल 2880 सीट है। इस साल 2250 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिए। इससे पूर्व के वर्षों में तो प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की दो हजार से भी कम रही। इलाहाबाद डिग्री कालेज में भी 1800 सीट है लेकिन वहां भी तकरीबन 700 सीट खाली रह गई। शून्य अंक पर प्रवेश लेने के बावजूद विद्यार्थी नहीं आए। ईश्वर शरण में स्वीकृत 1500 में से 1250 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी में बीए प्रथम वर्ष कुल 300 विद्यार्थी हैं। जबकि स्वीकृत सीट की संख्या 370 है। अन्य कालेजों में भी यही स्थिति है। अध्यापक इस स्थिति के लिए छात्र-छात्राओं में बीए के प्रति रुझान कम होने के साथ विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया में देरी को भी बड़ा कारण मानते हैं। हालांकि, इस बार समय से दाखिला होने की उम्मीद है लेकिन विश्वविद्यालय और कालेजों के सामने सीट भरने की चुनौती होगी।
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