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इलाहाबाद विश्वविद्यालयः छात्रसंघ चुनाव पर उठे गई गंभीर सवाल
Thu, 14 Mar 2019 08:30 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 14 Mar 2019 08:30 PM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) छात्रसंघ महामंत्री के निर्वाचन से पहले कुछ महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए। बात अब सामने आ रही है लेकिन निर्वाचन के दौरान हुई इस गड़बड़ी को लेकर प्रॉक्टर कार्यालय और परीक्षा नियंत्रक कार्यालय भी सवालों के घेरे में है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे की ओर से छात्रसंघ महामंत्री शिवम सिंह को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि चुनाव से पहले शिवम को परीक्षा से संबंधित अनुशासनहीनता करने एवं चेतावनी देकर छोड़ने से जुड़े अभिलेख चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में उपलब्ध हैं। इस मामले में परीक्षा नियंत्रक ने शिवम सिंह से सौ रुपये अर्थदंड के रूप में जमा कराए थे और जमा रसीद चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में प्रस्तुत की थी, जिसके बाद शिवम का परीक्षाफल घोषित किया गया था।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि शिवम ने यह तथ्य छिपाकर छात्रसंघ चुनाव में नामांकन किया और महामंत्री पद पर निर्वाचित हुए। नियमों के तहत अगर किसी छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है तो वह छात्रसंघ चुनाव लड़ने के लिए अर्ह नहीं है। शिवम से 31 मार्च तक कारण स्पष्ट करने को कहा गया है और पूछा गया है कि क्यों न इस मामले में उनकी चुनावी पात्रता शून्य करने की संस्तुति इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के अध्यक्ष एवं छात्रसंघ के संरक्षक कुलपति को भेज दी जाए।
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इस पूरे मामले में चीफ प्रॉक्टर कार्यालय और परीक्षा नियंत्रक कार्यालय भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि चुनाव से पहले प्रत्याशियों से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) इन दोनों दफ्तरों से प्राप्त किया जाता है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान एनओसी भी देखा जाता है। आखिर इन दोनों दफ्तरों ने एनओसी में इस महत्वपूर्ण तथ्य को शामिल क्यों नहीं किया और अगर किया तो नामांकन पत्रों की जांच करने वालों ने कोई आपत्ति क्यों नहीं। इन तमाम सवालों ने न केवल महामंत्री के निर्वाचन, बल्कि छात्रसंघ चुनाव पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रसंघ ने इविवि प्रशासन के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल दिया है। उपाध्यक्ष अखिलेश यादव, महामंत्री शिवम सिंह और संयुक्त मंत्री सत्यम सिंह सनी का कहना है कि केवल छात्रसंघ है, जो इविवि प्रशासन के काले कारनामों को सामने ला रहा है। अफसरों को यह बात पच नहीं रही, सो दबाव बनाने के लिए कार्रवाई की धमकी दी जा रही है लेकिन छात्रसंघ इससे पीछे हटने वाला नहीं है।
उपाध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलने पर पूर्व में भी कई छात्र नेताओं पर कार्रवाई हो चुकी है। पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र, पूर्व उपाध्यक्ष अदील हमजा को निष्कासित किया गया था और पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह की डिग्री तक रद्द कर दी गई। छात्रसंघ पदाधिकारियों पर एससी-एसटी का फर्जी मुकदमा थोपा किया। उपाध्यक्ष के चैंबर में पुलिस ने घुसकर मारपीट की और छात्रसंघ की गरिमा को तार-तार कर दिया। इविवि प्रशासन की इस मनमानी से छात्र डरने वाले नहीं। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रसंघ महामंत्री शिविम सिंह को निलंबित करने और इविवि में प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने से एबीवीपी के कार्यकर्ता भड़के हुए हैं। इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एबीवीपी के सह संयोजक रोहित मिश्र की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में कार्यकर्ताओं ने कहा कि इविवि प्रशासन की हरकत तानाशाही पूर्ण है और यह कार्रवाई व्यक्तिगत ईर्ष्या से की गई। रोहित मिश्र ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जब इविवि की परीक्षाएं चल रही हैं, उस वक्त इविवि प्रशासन मामले को राजनैतिक रंग देकर कैंपस के माहौल को बिगाड़ रहा है। बैठक में पूर्व महामंत्री निर्भय द्विवेदी समेत अभय, विवेक सिंह, निरंजन तिवारी, दिलीप सरोज, प्रवीन पासवान, पंकज यादव, चितरंजन राव आदि मौजूद रहे।
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चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे की ओर से छात्रसंघ महामंत्री शिवम सिंह को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि चुनाव से पहले शिवम को परीक्षा से संबंधित अनुशासनहीनता करने एवं चेतावनी देकर छोड़ने से जुड़े अभिलेख चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में उपलब्ध हैं। इस मामले में परीक्षा नियंत्रक ने शिवम सिंह से सौ रुपये अर्थदंड के रूप में जमा कराए थे और जमा रसीद चीफ प्रॉक्टर कार्यालय में प्रस्तुत की थी, जिसके बाद शिवम का परीक्षाफल घोषित किया गया था।
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नोटिस में आरोप लगाया गया है कि शिवम ने यह तथ्य छिपाकर छात्रसंघ चुनाव में नामांकन किया और महामंत्री पद पर निर्वाचित हुए। नियमों के तहत अगर किसी छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है तो वह छात्रसंघ चुनाव लड़ने के लिए अर्ह नहीं है। शिवम से 31 मार्च तक कारण स्पष्ट करने को कहा गया है और पूछा गया है कि क्यों न इस मामले में उनकी चुनावी पात्रता शून्य करने की संस्तुति इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के अध्यक्ष एवं छात्रसंघ के संरक्षक कुलपति को भेज दी जाए।
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इस पूरे मामले में चीफ प्रॉक्टर कार्यालय और परीक्षा नियंत्रक कार्यालय भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि चुनाव से पहले प्रत्याशियों से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) इन दोनों दफ्तरों से प्राप्त किया जाता है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान एनओसी भी देखा जाता है। आखिर इन दोनों दफ्तरों ने एनओसी में इस महत्वपूर्ण तथ्य को शामिल क्यों नहीं किया और अगर किया तो नामांकन पत्रों की जांच करने वालों ने कोई आपत्ति क्यों नहीं। इन तमाम सवालों ने न केवल महामंत्री के निर्वाचन, बल्कि छात्रसंघ चुनाव पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रसंघ ने इविवि प्रशासन के खिलाफ सीधे मोर्चा खोल दिया है। उपाध्यक्ष अखिलेश यादव, महामंत्री शिवम सिंह और संयुक्त मंत्री सत्यम सिंह सनी का कहना है कि केवल छात्रसंघ है, जो इविवि प्रशासन के काले कारनामों को सामने ला रहा है। अफसरों को यह बात पच नहीं रही, सो दबाव बनाने के लिए कार्रवाई की धमकी दी जा रही है लेकिन छात्रसंघ इससे पीछे हटने वाला नहीं है।
उपाध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलने पर पूर्व में भी कई छात्र नेताओं पर कार्रवाई हो चुकी है। पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र, पूर्व उपाध्यक्ष अदील हमजा को निष्कासित किया गया था और पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह की डिग्री तक रद्द कर दी गई। छात्रसंघ पदाधिकारियों पर एससी-एसटी का फर्जी मुकदमा थोपा किया। उपाध्यक्ष के चैंबर में पुलिस ने घुसकर मारपीट की और छात्रसंघ की गरिमा को तार-तार कर दिया। इविवि प्रशासन की इस मनमानी से छात्र डरने वाले नहीं। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रसंघ महामंत्री शिविम सिंह को निलंबित करने और इविवि में प्रवेश प्रतिबंधित किए जाने से एबीवीपी के कार्यकर्ता भड़के हुए हैं। इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एबीवीपी के सह संयोजक रोहित मिश्र की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में कार्यकर्ताओं ने कहा कि इविवि प्रशासन की हरकत तानाशाही पूर्ण है और यह कार्रवाई व्यक्तिगत ईर्ष्या से की गई। रोहित मिश्र ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जब इविवि की परीक्षाएं चल रही हैं, उस वक्त इविवि प्रशासन मामले को राजनैतिक रंग देकर कैंपस के माहौल को बिगाड़ रहा है। बैठक में पूर्व महामंत्री निर्भय द्विवेदी समेत अभय, विवेक सिंह, निरंजन तिवारी, दिलीप सरोज, प्रवीन पासवान, पंकज यादव, चितरंजन राव आदि मौजूद रहे।