इलाहाबाद विवि : नए छात्रों के लिए मुश्किल होगा हॉस्टलों में प्रवेश, इविवि प्रशासन ने लिया यह फैसला
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लंबे समय बाद स्नातक और परास्नातक की ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हो गई हैं। ऐसे में दूसरे जिलों में रहने वाले छात्र अब प्रयागराज लौट आए हैं। दो साल पहले जो छात्र स्नातक द्वितीय वर्ष या तृतीय वर्ष में थे, उनका पाठ्यक्रम अब पूरा हो चुका है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के शताब्दी ब्वॉयज हॉस्टल में रैगिंग की घटना सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि हॉस्टलों के कमरों पर अवैध कब्जा है। हॉस्टल दो साल से बंद पड़े हैं। इस दौरान जिन छात्रों ने अपना पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है, हॉस्टल के कमरों पर अब भी उनका कब्जा बरकरार है और अन्य छात्र हॉस्टल के लिए भटक रहे हैं। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन नए छात्रों को हॉस्टल आवंटित करता भी है तो उनके लिए हॉस्टल में प्रवेश मुश्किल होगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लंबे समय बाद स्नातक और परास्नातक की ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हो गई हैं। ऐसे में दूसरे जिलों में रहने वाले छात्र अब प्रयागराज लौट आए हैं। दो साल पहले जो छात्र स्नातक द्वितीय वर्ष या तृतीय वर्ष में थे, उनका पाठ्यक्रम अब पूरा हो चुका है।
इसी तरह वर्ष 2020 में परास्नातक की पढ़ाई कर रहे छात्रों को भी डिग्री मिल चुकी है। मार्च 2020 से इविवि के हॉस्टल बंद हैं। इनमें से जो छात्र हॉस्टल में रहते थे, वह कोरोना के दौरान हॉस्टल बंद होने पर कमरे की चाबी अपने साथ लेकर चले गए थे। उनका पाठ्यक्रम तो पूरा हो गया लेकिन हॉस्टल के कमरों पर अब भी उनके ताले लगे हुए हैं।
पुराने छात्र कमरा बंद कर चाभी ले गए साथ
विश्वविद्यालय में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने के बाद दूसरे जिलों में रहने वाले जो छात्र प्रयागराज वापस आए हैं, वह अब हॉस्टल आवंटित किए जाने की मांग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हॉस्टल आवंटन से पहले उसे अवैध कब्जे हटाने होंगे, जिसके लिए अभी तक कोई तैयारी नहीं की गई है।
प्रो. हांगलू के कार्यकाल में हास्टलों में हुई थी वॉशआउट की कार्रवाई
पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के कार्यकाल में हॉस्टल वॉशआउट की कार्रवाई की गई थी। उस वक्त काफी बवाल हुआ था और इसके बाद हॉस्टल खाली कराने के लिए कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया गया। ऐसे में अगर नए छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन हॉस्टल आवंटित करता भी है तो उनके लिए हॉस्टल में कब्जा पाना मुश्किल होगा।
‘सभी हॉस्टलों के अधीक्षकों ने अपने स्तर से उन छात्रों को हॉस्टल छोड़ने के लिए कहा है, जिनके पाठ्यक्रम पूरे हो चुके हैं और वह हॉस्टल में रहने के लिए अब अर्ह नहीं हैं। चीफ प्रॉक्टर से भी आग्रह किया जाएगा कि पुलिस के सहयोग से अवैध कब्जे हटाए जाएं। वहीं, हॉस्टल आवंटन के लिए नए छात्रों की लिस्ट भी तैयार की जा रही है। प्रक्रिया पूरी होते ही हॉस्टल आवंटित कर दिए जाएंगे और नए छात्रों को प्रवेश दिए जाएंगे।’ -प्रो. केपी सिंह, डीएसडब्ल्यू