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योगेश के आने के बाद दिलचस्प हुई इलाहाबाद की लड़ाई

Tue, 23 Apr 2019 01:28 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 23 Apr 2019 01:28 AM IST
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Allahabad's fight became interesting after Yogesh's arrival
yogesh shukla - फोटो : प्रयागराज
कांग्रेस की ओर से भाजपा से आए योगेश शुक्ला के उतारे जाने के बाद इलाहाबाद संसदीय सीट की लड़ाई दिलचस्प हो गई है। उनके आने के साथ ही इस सीट पर नए सियासी समीकरण बनने लगे हैं तथा भाजपा और महागठबंधन के बीच सीधी लड़ाई न होकर बहुकोणीय हो गई है। सपा ने इस सीट पर अगड़ा बनाम पिछड़ा कार्ड खेलने का संकेत पहले ही दे दिया है। अब भाजपा के बाद कांग्रेस की ओर से भी ब्राह्मण उम्मीदवार पर दांव खेले जाने के बाद सपा ने अगड़ों और पिछड़ों की इस सियासत को और धार देने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि योगेश की नई पारी कांग्रेस को क्षेत्र में फिर से खड़ा कर पाने में कितना सफल होती है। साथ ही भाजपा के लिए कितनी चुनौती बन पाती है।
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योगेश ने 2009 में भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ा था। उस समय उन्हें 60983 वोट मिले थे तथा सपा और बसपा के बाद तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद भी वह यमुनापार के विभिन्न मुद्दाें को लेकर लगातार सक्रिय रहे। कलश यात्रा निकालने के साथ कॉटन मिल के कर्मचारियों की हक के लिए भी संघर्ष किया। इस वजह से क्षेत्र के हर तबके के मतदाताओं के साथ उनका मजबूत रिश्ता है। अगड़ों के साथ पिछड़ों के बीच भी उनकी अच्छी छवित है। इसी सक्रियता तथा रिश्तों के दम पर वह भाजपा से टिकट के दावेदारों में भी शामिल रहे। अब टिकट नहीं मिलने के बाद नामांकन की आखिरी तारीख से एक दिन पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
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कांग्रेस ने उन्हें पार्टी ज्वाइन कराने के साथ इलाहाबाद से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। इलाहाबाद संसदीय सीट के अंतर्गत सबसे अधिक करीब साढ़े तीन लाख ब्राह्मण मतदाता हैं। इनके अलावा पौने तीन लाख कायस्थ तथा अन्य सवर्ण मतदाता हैं। इनके अलावा पटेल मतदाताओं की संख्या करीब पौने तीन लाख तथा करीब दो लाख यादव हैं। इनके अलावा अन्य पिछड़ी जाति मतदाताओं की संख्या भी दो लाख के करीब बताई जाती है। इसी जातीय समीकरण के साथ पिछड़ों एवं अनुसूचित जाति तथा आदिवासियों के बीच मजबूत पकड़ को देखते हुए भाजपा ने डॉ.रीता बहुगुणा जोशी को मैदान में उतारा है लेकिन अब योगेश के कांग्रेस से आने के बाद भाजपा के सामने सवर्ण मतदाताओं के ध्रुवीकरण की चुनौती बढ़ गई है तो सपा के लिए भी अगड़ा बनाम पिछड़ा का दांव आसान नहीं होगा।
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