फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad remained awake the whole night of power transfer

सत्ता हस्तांतरण की पूरी रात जागता रहा इलाहाबाद

Sun, 15 Aug 2021 01:08 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 15 Aug 2021 01:08 AM IST
सार

  • प्रथम स्वतंत्रता पर्व पर लोकनाथ,घंटाघर और अतरसुइया से निकाले गए थे विजय जुलूस, विजयलक्ष्मी पंडित की मौजूदगी में कचहरी पर फहराया गया था तिरंगा

विज्ञापन
Allahabad remained awake the whole night of power transfer
prayagraj news : स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आजाद पार्क में फेंस पेंटिंग कर खुशी कर इजहार करते इविवि दृश्य कला विभाग के विद्यार्थी। - फोटो : prayagraj

विस्तार

14 अगस्त 1947 का दिन। समय शाम पांच बजे। छतों, सीढ़ियों से लेकर चहारदीवारियों तक इस तरह कतारबद्ध दीये जलाए गए, ऐसा उल्लास जैसे दिवाली मनाई जा रही हो। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में दिन रात जश्न मनता रहा। सुबह से ही कोई दीया-बाती सजाने में जुटा रहा, तो कोई फूलों के वंदनवार बनाने में। 15 अगस्त की सुबह हर मुहल्ले से प्रथम स्वतंत्रता पर्व पर जुलूस निकाले गए और कचहरी पर तिरंगा फहरा कर भारत माता की जय और वंदेमातरम के जयकारे लगाए गए।

विज्ञापन


देश की स्वतंत्रता के एलान के दिन के जश्न की यादों को ताजा कर मीरापुर के 92 वर्षीय प्रेम शंकर खरे भावुक हो जाते हैं। वह बताते हैं कि वैसी खुशी उन्होंने अब तक अपने जीवन में कभी नहीं देखी। तब सर सुंदरलाल हॉस्टल के छात्र रहे खरे बताते हैं कि पूरे हॉस्टल में जश्न का माहौल था। पीसी बनर्जी हॉस्टल में कुछ छात्रों ने देश के स्वतंत्र होने की खुशी में सांस्कृतिक आयोजन किया था।
विज्ञापन


सरसुंदर लाल के छात्रों के अलावा हॉलैंड हॉल के भी छात्र वहां पहुंच गए थे। पूरे हॉस्टल को भव्यता से सजाया गया था। नृत्य, गायन और कविता पाठ आरंभ हो गया। टीएन चतुर्वेदी और प्रेमशंकर गुप्ता के नेतृत्व में नीचे के यह खुशी मनाई जा रही थी। हॉस्टल के सामने विश्वविद्यालय रोड पर चचा की मिठाई की मशहूर दुकान पर दोपहर में ही रेडियो लगा दिया गया था, ताकि रात 12 बजे पं. जवाहर लाल नेहरू के राष्ट्र के नाम दिए जाने वाले संदेश को सुना जा सके। शाम पांच बजे से ही हॉस्टल को दीयों से सजाया जाने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक सांझ ढलती रही, दूसरी ओर दीपदान होता रहा। सर सुंदर लाल हॉस्टल परिसर में आतिशबाजी होने लगी। रात ढलने के साथ ही हर किसी को सत्ता हस्तांतरण की घड़ी का इंतजार था। खरे बताते हैं कि हर हॉस्टल से निकलकर छात्र चचा की दुकान पर जुटने लगे। दिन रात के फर्क मिट गए थे। सत्ता हस्तांतरण होने के साथ ही पं. नेहरू का रेडियो पर राष्ट्र के नाम संदेश प्रसारित होने लगा। नेहरू जी के हर वाक्य पर जयकारे लग रहे थे। चचा की दुकान पर उसी भीड़ में कुछ लोग मिठाई बांट रहे थे। रात भर लोग स्वतंत्र होने की खुशी के बीच जागते रहे।

हिंदुस्तानी एकेडमी के पूर्व अध्यक्ष और वृंदावन शोध संस्थान के निदेशक रह चुके 88 वर्षीय हरि मोहन मालवीय भी उस दिन के साक्षी रहे हैं। वह बताते हैं कि 15 अगस्त 1947 की सुबह हर किसी के लिए खास थी। घंटाघर को ध्वजा-पताकाओं और फूलों से सजा दिया गया था। लोकनाथ से विश्वंभरनाथ पांडेय के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया, तो पुरुषोत्तम दास टंडन और पं. सुंदरलाल के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों का हुजूम नारेबाजी करते हुए अतरसुइया की तरफ से बढ़ा।


चौक से शाहगंज मार्ग पर लोग अपने-अपने छतों से पुष्पवर्षा कर रहे थे। चौक से निकले एक जुलूस का नेतृत्व विजय लक्ष्मी पंडित कर रही थीं। कई मुहल्लों से निकले विजय जुलूस चौक स्थित नीम के पेड़ के नीचे पहुंचकर सभा में तब्दील हो गए। हर तरफ नारे लग रहे थे। कहीं जलेबी और पूड़ियों के पैकेट बांटे जा रहे थे, तो कहीं नगाड़े के साथ सड़कों पर समूहों में नृत्य हो रहा था। उस दिन शहर के हर हिस्से से निकले जुलूस कचहरी पहुंचे और वहां प्रथम स्वतंत्रता पर्व का ध्वज फहराया गया।   

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed