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पहले दिन फेल हुए परीक्षा के इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 19 Feb 2016 12:10 AM IST
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यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन बोर्ड की ओर से किए गए सारे इंतजाम फेल हो गए। केंद्र व्यवस्थापकों को बोर्ड की ओर से तैयार मोबाइल ऐप फेल हो गया। क्विक रिस्पांस कोड (क्यूआरसी) के लिए दिए गए मोबाइल सिम पहले दिन काम नहीं कर सके। बोर्ड की ओर से इस सिम को रिचार्ज तक नहीं करवाया गया था। हेल्पलाइन पर डायल करने पर लगातार व्यस्त टोन मिल रही थी। प्रधानाचार्यों ने बताया कि सिम को 500 रुपये से रिचार्ज करना है। केंद्र व्यस्थापकों के सामने समस्या खड़ी हो गई कि वह किस नंबर पर सिम को रिचार्ज करवाएं। प्रधानाचार्यों ने बताया कि दूसरी पाली की परीक्षा में क्यूआरसी सिस्टम पूरी तरह से फेल रहा। इसमें परीक्षार्थियों का रिकार्ड खुला ही नहीं।
पहले दिन ही बोर्ड की ओर से लागू क्यूआरसी सिस्टम फेल होने के बाद अब केंद्र व्यवस्थापकों को पुरानी व्यवस्था के आधार पर परीक्षार्थियाें का विवरण बोर्ड को भेजना होगा। प्रदेश सरकार की ओर से लागू किया गया मोबाइल ऐप फेल होने के संबंध में प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल से सवाल करने पर वह इस संबंध में कुछ भी बोलने से मना कर दिए। बार-बार सवाल करने के बाद उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था को सफल होने में समय लगता है। अमर उजाला की ओर इस ऐप लागू किए जाने के मामले में मोबाइल कंपनी का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाने पर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया।
बोर्ड की ओर से पहली बार लागू क्यूआरसी फेल होने तथा सीसीटीवी व्यवस्था लागू नहीं होने से परीक्षा केंद्रों पर मनमानी रही। सीसीटीवी नहीं लगाने के बोर्ड के फैसले से नकल रोकना कठिन हो गया। परीक्षा केंद्रों पर अबकी बार केंद्र व्यवस्थापकों की ओर से वीडियो रिकार्डिंग भी नहीं करवाई गई। 2015 की बोर्ड परीक्षा से पहले तत्कालीन प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा एसपी सिंह ने परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी लगाने की बात कही थी, उनके हटने के बाद कोडिंग वाली कॉपी की व्यवस्था लागू होने से कई केंद्र व्यवस्थापकों को परेशानी हुई। कापियों पर एक नहीं दो-दो कोड पड़े होने और कोड मिसिंग होने से परेशानी हुई। जिला विद्यालय निरीक्षक कोमल यादव क्यूआरसी के सफल होने का दावा कर रहे है, जब उनसे कहा गया कि दूसरी पाली में क्यूआरसी काम नहीं किया तो उनका कहना था कि सर्वर के कारण परेशानी हुई।
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पहले दिन ही बोर्ड की ओर से लागू क्यूआरसी सिस्टम फेल होने के बाद अब केंद्र व्यवस्थापकों को पुरानी व्यवस्था के आधार पर परीक्षार्थियाें का विवरण बोर्ड को भेजना होगा। प्रदेश सरकार की ओर से लागू किया गया मोबाइल ऐप फेल होने के संबंध में प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल से सवाल करने पर वह इस संबंध में कुछ भी बोलने से मना कर दिए। बार-बार सवाल करने के बाद उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था को सफल होने में समय लगता है। अमर उजाला की ओर इस ऐप लागू किए जाने के मामले में मोबाइल कंपनी का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाने पर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया।
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बोर्ड की ओर से पहली बार लागू क्यूआरसी फेल होने तथा सीसीटीवी व्यवस्था लागू नहीं होने से परीक्षा केंद्रों पर मनमानी रही। सीसीटीवी नहीं लगाने के बोर्ड के फैसले से नकल रोकना कठिन हो गया। परीक्षा केंद्रों पर अबकी बार केंद्र व्यवस्थापकों की ओर से वीडियो रिकार्डिंग भी नहीं करवाई गई। 2015 की बोर्ड परीक्षा से पहले तत्कालीन प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा एसपी सिंह ने परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी लगाने की बात कही थी, उनके हटने के बाद कोडिंग वाली कॉपी की व्यवस्था लागू होने से कई केंद्र व्यवस्थापकों को परेशानी हुई। कापियों पर एक नहीं दो-दो कोड पड़े होने और कोड मिसिंग होने से परेशानी हुई। जिला विद्यालय निरीक्षक कोमल यादव क्यूआरसी के सफल होने का दावा कर रहे है, जब उनसे कहा गया कि दूसरी पाली में क्यूआरसी काम नहीं किया तो उनका कहना था कि सर्वर के कारण परेशानी हुई।
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