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अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी समझें : चद्रचूड
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 17 Feb 2016 12:10 AM IST
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राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ.डीवाई चंद्रचूड ने सफल और अच्छा नागरिक बनने की सीख दी। उन्होंने कहा कि खुद के अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों को भी समझने और उसे निभाने की जरूरत है। खुद के घर की सफाई के साथ पर्यावरण संरक्षण के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि खुद की समस्या को बड़ा न समझें। आगे बढ़ेंगे तो पाएंगे कि यह सबकी समस्या है। इसलिए निराश न होकर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। दूसरों की प्रतिक्रिया देने के लिए खुद में सुधार के बारे में भी सोचना चाहिए। उन्होेंने उपाधिधारकों को दिल बड़ा करने की नसीहत दी। कहा कि विद्या और जीवन के अनुभवों से सोच को विस्तार देने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश ने अपील की कि पाठ्यक्रम राष्ट्रीय चेतना, मानवीय संवेदनों, विधि विरुद्ध कार्यों को रोकने आदि पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में मंगलवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में 12 हजार 800 विद्यार्थियों को उपधि देने की घोषणा की गई। 73 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। डिग्री पाकर छात्र-छात्राएं उत्साहित रहे। विभिन्न विद्याशाखाओं में सर्वोच्च स्थान पाने वाले 18 विद्यार्थियों को स्वण पदक दिए गए। कानपुर की रश्मि मिश्रा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। राज्यपाल और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मेडल प्रदान किए। इस दौरान तीन पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
समारोह में स्नातकोत्तर वर्ग में आजमगढ़ के अजय कुमार वर्मा (अर्थशास्त्र), इलाहाबाद की प्राची सिंह (राजनीति शास्त्र), लखनऊ के अनुभव सिंह (एमकॉम), वाराणसी के त्रिलोक सिंह (एमसीए), झांसी की अमृता लोहिया (शिक्षाशास्त्र), आजमगढ़ की सुनीता कुमारी मौर्या (एमएससी जैव रसायन) को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। स्नातक वर्ग में गाजीपुर के जितेंद्र कुमार को समाज विद्या शाखा, इलाहाबाद की कुसुमलता को प्रबंधन शाखा, प्रतापगढ़ के प्रियंक श्रीवास्तव को बीकॉम, वाराणसी के शुभम गोस्वामी को बीसीए, कानपुर की रश्मि मिश्रा को बीएड, कुशीनगर के आदित्य ओझा को बीएससी में गोल्ड पदक मिला। इनके अलावा रश्मि मिश्रा, इलाहाबाद की प्रीति सागर, वाराणसी की अंजलि आर्य, कुसुम लता और प्राची सिंह को दानदाता स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुलसचिव ने बीए के 2610, बीसीए के 231, बीएलआईएस के 753, एमए के 5525, एमएलआईएस के 324, बीएड के 784, बीएड स्पेशल एजुकेशन के 684, पीजीपीडी के 352, एमसीए के 28, एमजे के 133, पीजीडीसीए के 51, पीजीडीजेएमसी के 112, पीएचडी के 73, एमबीए के 68, बीकॉम के 209, एमकॉम के 351, बीएससी के 116, एमएससी के 260 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने की घोषणा की।
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कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित रश्मि मिश्रा कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कालेज में संस्कृत की शिक्षक हैं। अध्यापन में विशिष्टिता के लिए उन्होंने मुक्त विश्वविद्यालय से पीएचडी की। रश्मि के पति आदित्य मिश्रा इंजीनियर हैं और 12 साल का एक बेटा है। संस्कृत में परास्नातक और नेट रश्मि ने मुक्त विश्वविद्यालय में हिन्दी से पीजी करने के लिए दाखिला लिया है। उन्होंने बताया कि वह पीएचडी करके उच्च शिक्षा में शिक्षण कार्य करना चाहती हैं। उन्हाेंने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय ने उन जैसी महिलाओं के लिए रास्ते खोल दिए हैं। अन्य लोगों को भी आगे आना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके आदर्श हैं। प्रधानमंत्री की स्पष्टवादिता और राष्ट्र के प्रतिबद्धता की वह कायल हैं।
राज्यपाल के अंदाजे बयां पर भी उनके संबोधन के दौरान लगातार तालियां बजती रहीं। मुक्त विवि के दीक्षांत समारोह में पहली बार सभी लोग पारंपरिक परिधान में रहे लेकिन इसकी प्रेरणा देने वाले राज्यपाल स्वयं धोती नहीं पहने हुए थे। इस पर राज्यपाल ने चुटकी ली कि उन्हें कुलपति ने धोती पहनने के लिए नहीं दी। उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि उन्हें धोती-कुर्ता पहनने के लिए दिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए वह निर्धारित ड्रेस में नहीं हैं। समारोह शुरू होते ही बूंदाबांदी शुरू हो गई। इस पर राज्यपाल ने कहा कि इंद्रदेव भी स्वागत करने के लिए आए हैं लेकिन साथ में यह संदेश भी दे रहे हैं कि आगे से समारोह इस तरह से पांडाल में न हो। विश्वविद्यालय का अपना सभागार हो। विश्वविद्यालय के सभागार का 13 अप्रैल का शिलान्यास होना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिलान्यास के लिए वह फिर आएंगे। इस तरह की उनकी कई अन्य टिप्पणियों पर भी ठहाके लगे।
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उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में मंगलवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में 12 हजार 800 विद्यार्थियों को उपधि देने की घोषणा की गई। 73 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। डिग्री पाकर छात्र-छात्राएं उत्साहित रहे। विभिन्न विद्याशाखाओं में सर्वोच्च स्थान पाने वाले 18 विद्यार्थियों को स्वण पदक दिए गए। कानपुर की रश्मि मिश्रा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। राज्यपाल और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मेडल प्रदान किए। इस दौरान तीन पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
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समारोह में स्नातकोत्तर वर्ग में आजमगढ़ के अजय कुमार वर्मा (अर्थशास्त्र), इलाहाबाद की प्राची सिंह (राजनीति शास्त्र), लखनऊ के अनुभव सिंह (एमकॉम), वाराणसी के त्रिलोक सिंह (एमसीए), झांसी की अमृता लोहिया (शिक्षाशास्त्र), आजमगढ़ की सुनीता कुमारी मौर्या (एमएससी जैव रसायन) को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। स्नातक वर्ग में गाजीपुर के जितेंद्र कुमार को समाज विद्या शाखा, इलाहाबाद की कुसुमलता को प्रबंधन शाखा, प्रतापगढ़ के प्रियंक श्रीवास्तव को बीकॉम, वाराणसी के शुभम गोस्वामी को बीसीए, कानपुर की रश्मि मिश्रा को बीएड, कुशीनगर के आदित्य ओझा को बीएससी में गोल्ड पदक मिला। इनके अलावा रश्मि मिश्रा, इलाहाबाद की प्रीति सागर, वाराणसी की अंजलि आर्य, कुसुम लता और प्राची सिंह को दानदाता स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुलसचिव ने बीए के 2610, बीसीए के 231, बीएलआईएस के 753, एमए के 5525, एमएलआईएस के 324, बीएड के 784, बीएड स्पेशल एजुकेशन के 684, पीजीपीडी के 352, एमसीए के 28, एमजे के 133, पीजीडीसीए के 51, पीजीडीजेएमसी के 112, पीएचडी के 73, एमबीए के 68, बीकॉम के 209, एमकॉम के 351, बीएससी के 116, एमएससी के 260 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करने की घोषणा की।
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कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित रश्मि मिश्रा कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन इंटर कालेज में संस्कृत की शिक्षक हैं। अध्यापन में विशिष्टिता के लिए उन्होंने मुक्त विश्वविद्यालय से पीएचडी की। रश्मि के पति आदित्य मिश्रा इंजीनियर हैं और 12 साल का एक बेटा है। संस्कृत में परास्नातक और नेट रश्मि ने मुक्त विश्वविद्यालय में हिन्दी से पीजी करने के लिए दाखिला लिया है। उन्होंने बताया कि वह पीएचडी करके उच्च शिक्षा में शिक्षण कार्य करना चाहती हैं। उन्हाेंने कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय ने उन जैसी महिलाओं के लिए रास्ते खोल दिए हैं। अन्य लोगों को भी आगे आना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके आदर्श हैं। प्रधानमंत्री की स्पष्टवादिता और राष्ट्र के प्रतिबद्धता की वह कायल हैं।
राज्यपाल के अंदाजे बयां पर भी उनके संबोधन के दौरान लगातार तालियां बजती रहीं। मुक्त विवि के दीक्षांत समारोह में पहली बार सभी लोग पारंपरिक परिधान में रहे लेकिन इसकी प्रेरणा देने वाले राज्यपाल स्वयं धोती नहीं पहने हुए थे। इस पर राज्यपाल ने चुटकी ली कि उन्हें कुलपति ने धोती पहनने के लिए नहीं दी। उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि उन्हें धोती-कुर्ता पहनने के लिए दिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए वह निर्धारित ड्रेस में नहीं हैं। समारोह शुरू होते ही बूंदाबांदी शुरू हो गई। इस पर राज्यपाल ने कहा कि इंद्रदेव भी स्वागत करने के लिए आए हैं लेकिन साथ में यह संदेश भी दे रहे हैं कि आगे से समारोह इस तरह से पांडाल में न हो। विश्वविद्यालय का अपना सभागार हो। विश्वविद्यालय के सभागार का 13 अप्रैल का शिलान्यास होना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिलान्यास के लिए वह फिर आएंगे। इस तरह की उनकी कई अन्य टिप्पणियों पर भी ठहाके लगे।