इस्कॉन पर शंकराचार्य का बयान दुर्भाग्यपूर्ण
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इस्कॉन कम्युनिकेशन के संचालक व्रजेन्द्रनन्दन दास का कहना है कि इस्कॉन को लेकर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की ओर से दिया गया बयान पूरी तरह से निराधार है। यह इस्कॉन के विरुद्ध द्वेषपूर्ण और उसकी छवि को क्षति पहुँचाने वाला है। इस्कॉन बड़े पैमाने पर आध्यात्मिक कल्याण के लिए विश्वभर में भारत और भारतीय संस्कृति को प्रचारित करने में सफल हुआ है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा, बीते 45 वर्षों से भारत में सेवारत इस्कॉन अपने विशाल एवं भव्य मंदिरों के कारण सुविख्यात है । तकरीबन छह सौ मंदिरों और लाखों अनुयायी भक्त वाला इस्कॉन भारत में सबसे अधिक प्रख्यात धार्मिक संस्था है, जिसने किसी जाति, वर्ण, लिंग, राष्ट्रीयता, भाषा या समुदाय के पक्षपात के बिना कृष्णभक्ति को सम्पूर्ण विश्व में प्रचारित किया है। वर्ष 1971 से हर कुम्भ मेले में इस्कॉन के शिविर में साधुओं और तीर्थयात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन और सत्संग का आयोजन किया जाता है ।
वहीं इस्कॉन भारतीय संस्कृति के एक राजदूत के समान विश्वभर में प्रशंशित है। असम, छत्तीसगढ़, मणिपुर, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में इस्कॉन के दो दर्जन से अधिक केंद्र हैं। इस्कॉन आदिवासी संरक्षण कार्यक्त्रस्म के अंतर्गत 30 जिलों में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविरों, शिक्षा केन्द्रों एवं स्वयं सहायता समूहों का संचालन करता है, ऐसे में शंकराचार्य का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। वह अपने बयान पर पुनर्विचार करें क्योंकि इससे लाखों अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।