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रामचरित मानस को मिले राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 11 Feb 2016 01:42 AM IST
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रामायण मेला समिति के तत्वाधान में बुधवार को तीन दिवसीय रामायण मेला माघ मेला क्षेत्र काली सड़क स्थित टीकरमाफी के महंत स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी के शिविर में शुरू हुआ। मानस मर्मज्ञ एवं संतों ने रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा देने की मांग की। रामायण मेले का उद्घाटन करते काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा भगवान राम ने मर्यादा का आदर्श मानव जीवन में प्रस्तुत किया है। आसुरी शक्तियों का विनाश कर रामराज्य की स्थापना की है। गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा देने की बात की।
कार्यक्रम की शुरूआत रामपंचायतन पर माल्यार्पण से हुई। समिति के अध्यक्ष स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने रामायण मेले की उपादेयता के बारे में बताया और संस्थापक महामंत्री डा. महेश अवस्थी का स्मरण किया। महामंत्री डा. शंभूनाथ त्रिपाठी ने मेले का विवरण प्रस्तुत किया। स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, शिवमंगल दास आदि ने विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम की शुरूआत रामपंचायतन पर माल्यार्पण से हुई। समिति के अध्यक्ष स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने रामायण मेले की उपादेयता के बारे में बताया और संस्थापक महामंत्री डा. महेश अवस्थी का स्मरण किया। महामंत्री डा. शंभूनाथ त्रिपाठी ने मेले का विवरण प्रस्तुत किया। स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, शिवमंगल दास आदि ने विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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