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करवरिया बंधु बसपा से निष्कासित
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 10 Feb 2016 01:43 AM IST
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पूर्व सांसद एवं बसपा नेता कपिल मुनि करवरिया और उनके भाई एवं एमएलसी सूरज भान करवरिया को बसपा से निष्कासित कर दिया गया है। आरोप है कि दोनों भाई पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे और पार्टी में ब्राह्मण कार्यकर्ताओं को आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे।
कपिल मुनि करवरिया 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर फूलपुर से सांसद निर्वाचित हुए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा ने उन पर भरोसा जताया और पार्टी से फिर टिकट मिल गया लेकिन इस बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। उनके भाई सूरज भान करवरिया बसपा के ही टिकट पर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र इलाहाबाद-कौशाम्बी के लिए एमएलसी निर्वाचित हुए थे। इलाहाबाद में दोनों भाइयों को बसपा के ब्राह्मण चेहरे के रूप में सामने लाया गया। हालांकि इससे पार्टी के अन्य ब्राह्मण कार्यकर्ता नाराज हो गए हो गए और पार्टी के भीतर अंतर्विरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस बीच खबर आने लगी कि कवरिया बंधुओं की भाजपा से नजदीकियां बढ़ रही हैं। इन परिस्थितियों में पार्टी ने करवरिया बंधुओं पर लगे आरोपों की जांच कराई।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव इंदजीत सरोज, इलाहाबाद मिर्जापुर मंडल के जोनल कोऑर्डिनेटर आरके चौधरी और अखिलेश अंबेडकर के संयुक्त हस्ताक्षर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से कहा गया है कि जांच पड़ताल में आरोपों की पुष्टि हुई है और इसी वजह से दोनों भाइयों को बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किए जाने का निर्णय लिया गया है। बसपा नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से ही करवरिया बंधु पर अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगने लगा था। आरोप यह भी था कि उन्होंने अपने रहते किसी दूसरे ब्राह्मण कार्यकर्ता को आगे नहीं बढ़ने दिया। इससे पार्टी को लगातार नुकसान हो रहा था। ऐसे स्थिति में दोनों नेताओं को पार्टी में बनाए रखना हितकर नहीं रह गया था। इसी वजह से उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया।
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कपिल मुनि करवरिया 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर फूलपुर से सांसद निर्वाचित हुए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा ने उन पर भरोसा जताया और पार्टी से फिर टिकट मिल गया लेकिन इस बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। उनके भाई सूरज भान करवरिया बसपा के ही टिकट पर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र इलाहाबाद-कौशाम्बी के लिए एमएलसी निर्वाचित हुए थे। इलाहाबाद में दोनों भाइयों को बसपा के ब्राह्मण चेहरे के रूप में सामने लाया गया। हालांकि इससे पार्टी के अन्य ब्राह्मण कार्यकर्ता नाराज हो गए हो गए और पार्टी के भीतर अंतर्विरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस बीच खबर आने लगी कि कवरिया बंधुओं की भाजपा से नजदीकियां बढ़ रही हैं। इन परिस्थितियों में पार्टी ने करवरिया बंधुओं पर लगे आरोपों की जांच कराई।
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बसपा के राष्ट्रीय महासचिव इंदजीत सरोज, इलाहाबाद मिर्जापुर मंडल के जोनल कोऑर्डिनेटर आरके चौधरी और अखिलेश अंबेडकर के संयुक्त हस्ताक्षर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से कहा गया है कि जांच पड़ताल में आरोपों की पुष्टि हुई है और इसी वजह से दोनों भाइयों को बहुजन समाज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किए जाने का निर्णय लिया गया है। बसपा नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव 2014 के बाद से ही करवरिया बंधु पर अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगने लगा था। आरोप यह भी था कि उन्होंने अपने रहते किसी दूसरे ब्राह्मण कार्यकर्ता को आगे नहीं बढ़ने दिया। इससे पार्टी को लगातार नुकसान हो रहा था। ऐसे स्थिति में दोनों नेताओं को पार्टी में बनाए रखना हितकर नहीं रह गया था। इसी वजह से उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया।
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