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‘कफन’ के बहाने बयां हुआ समाज का यथार्थ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 04 Feb 2016 12:15 AM IST
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स्वर्ग रंगमंडल की ओर से बुधवार को सांस्कृतिक केंद्र में मुुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी कफन का नौटंकी शैली में मंचन किया गया। लोककलाविद अतुल यदुवंशी के निर्देशन में सजी नौटंकी के बहाने समाज के सच को बखूबी बयां किया गया। गरीबी, बेबसी, भुखमरी, लाचारी का यथार्थ चित्रण करती कफन की प्रस्तुति दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में सफल रही।
राजकुमार श्रीवास्तव द्वारा रूपांतरित नौटंकी में मानवीय संवेदनाओं के मर्म को घीसू और माधव के माध्यम से दर्शाया गया, जो समाज के चलन के हिसाब से ढले हैं। हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले किसान जो अन्नदाता होते हुए भी कर्ज और लगान के बोझ तले भूखे सोने को मजबूर है। ऐसे में बिन मेहनत के अपना पेट भरने की कला विकसित कर चुके, फटे हाल रहने वाले घीसू-माधव को कोई भी सता नहीं पाता है। माधव की बीवी और घीसू की बहू बुधिया के मरने पर उसके कफन के लिए इकट्ठे हुए पैसों से दोनों जमकर शराब पीते हैं। वहीं बुधिया के मरने पर वह खुश भी होते हैं कि वह गरीबी और जिंदगी के जंजाल से मुक्त हो गई।
नौटंकी में धीरज अग्रवाल, सोनी कुमार गुप्ता, सचिन केसरवानी, ऋषिकेश जायसवाल, शालिनी श्रीवास्तव, सोनाली चक्रवर्ती, अतुल शुक्ला, रतिभान सिंह, अमित भारती, धर्म शंकर दीक्षित, एजाज खान, शिव प्रकाश, स्वाति दूबे, शिवानी कश्यप, वैश्नवी केसरी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं का बेहतर निर्वाह किया। हारमोनियम पर दिलीप कुमार-गुलशन, ढोलक पर आदिनाथ और नक्कारा पर नगीना से संगत दी। अपर महाधिवक्ता कमरुल हसन सिद्दीकी मुख्य अतिथि और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र निदेशक डॉ. संतोष भदौरिया बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
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राजकुमार श्रीवास्तव द्वारा रूपांतरित नौटंकी में मानवीय संवेदनाओं के मर्म को घीसू और माधव के माध्यम से दर्शाया गया, जो समाज के चलन के हिसाब से ढले हैं। हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले किसान जो अन्नदाता होते हुए भी कर्ज और लगान के बोझ तले भूखे सोने को मजबूर है। ऐसे में बिन मेहनत के अपना पेट भरने की कला विकसित कर चुके, फटे हाल रहने वाले घीसू-माधव को कोई भी सता नहीं पाता है। माधव की बीवी और घीसू की बहू बुधिया के मरने पर उसके कफन के लिए इकट्ठे हुए पैसों से दोनों जमकर शराब पीते हैं। वहीं बुधिया के मरने पर वह खुश भी होते हैं कि वह गरीबी और जिंदगी के जंजाल से मुक्त हो गई।
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नौटंकी में धीरज अग्रवाल, सोनी कुमार गुप्ता, सचिन केसरवानी, ऋषिकेश जायसवाल, शालिनी श्रीवास्तव, सोनाली चक्रवर्ती, अतुल शुक्ला, रतिभान सिंह, अमित भारती, धर्म शंकर दीक्षित, एजाज खान, शिव प्रकाश, स्वाति दूबे, शिवानी कश्यप, वैश्नवी केसरी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं का बेहतर निर्वाह किया। हारमोनियम पर दिलीप कुमार-गुलशन, ढोलक पर आदिनाथ और नक्कारा पर नगीना से संगत दी। अपर महाधिवक्ता कमरुल हसन सिद्दीकी मुख्य अतिथि और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र निदेशक डॉ. संतोष भदौरिया बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
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