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तो नप जाएंगे कई थानेदार और कारखास सिपाही
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 11 Jan 2016 12:20 AM IST
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नए डीजीपी जावीद अहमद ने थानेदारों और सिपाहियों की तैनाती के पुुराने नियमों पर अमल करने का नए सिरे से फरमान जारी किया है, लेकिन इस पर शक है कि नेताओं के दम पर मनचाही पोस्टिंग हासिल करने वाले दरोगा या सिपाहियों को हटाया जा सकेगा। सच्चाई तो यह है कि अगर इस फरमान पर सख्ती से पालन किया जाए तो इलाहाबाद में कई थानेदार और तमाम कारखास सिपाही पैदल हो जाएंगे। मगर डीजीपी का आदेश जारी होने के साथ ही जनपद के थानों में तैनात कारखास सिपाहियों ने जुगाड़ भिड़ाना और कहना शुरू कर दिया है कि उन्हें कोई नहीं हटा सकता।
58 साल से ज्यादा उम्र के दरोगा और इंस्पेक्टर की थाना प्रभारी पद पर तैनाती नहीं करने का आदेश कई साल पुराना है। इसी तरह एक थाने में किसी सिपाही की तीन साल से ज्यादा वक्त तक तैनाती न करने का भी फरमान पुराना है। मगर सत्ताधारी नेताओं से सेटिंग रखने वाले दरोगाओं और सिपाहियों के लिए यह आदेश मायने नहीं रखता। नए डीजीपी जावीद अहमद ने सभी आईजी, डीआईजी, एसपी को सर्कुलर जारी कर इस आदेश का सख्ती से पालन करने के लिए कहा जरूर है, लेकिन इस पर अमल करने के लिए अधिकारियों को इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
आलम यह है कि इलाहाबाद में मौजूदा समय में करेली, कीडगंज, सिविल लाइंस, दारागंज, कर्नलगंज, जार्जटाऊन, नैनी, धूमनगंज थाने और चौकियों में तीन साल से ज्यादा समय से तैनात कई सिपाही कारखास के तौर पर धन उगाही कर रहे हैं। कारखास यानी वे सिपाही जो थानेदार का चहेता होने की वजह से इलाके की सभी नाजायज वसूली और रोज तमाम मामलों में पैसों का लेनदेन करता है। वही जुआ-सट्टा के अड्डों से भी उगाही करते हैं। डीजीपी के आदेश के तहत इन सभी सिपाहियों का तबादला किया जाना चाहिए।
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58 साल की आयु पूरी कर चुके थानेदारों में कैंट थाना प्रभारी एमएम अंसारी, बारा थाना प्रभारी आरपी राय, नैनी इंस्पेक्टर रमेश पांडेय, मेजा थाना प्रभारी पीएन मिश्रा, झूंसी थाना प्रभारी रामदरश यादव, कर्नलगंज थाना प्रभारी सिद्धार्थ तोमर के नाम की चर्चा है। अब देखना यह है कि इनमें से कितने थानेदारों को आयु सीमा पार करने की वजह से हटाया जाएगा।
इस मामले में एक तथ्य यह भी है कि नए डीजीपी ने जिस आदेश का पालन करने का सर्कुलर जारी किया है, एडीजी रेलवे रहते खुद वह इसकी अनदेखी करते रहे। यूपी में जीआरपी थानों में इंस्पेक्टर को हटाने और तैनात करने में एडीजी रेलवे का हाथ होता है। उस लिहाज से उन्होंने एडीजी रहते इलाहाबाद के जीआरपी थाना प्रभारी वशिष्ठ सिंह यादव की उम्र को नजरंदाज किया।
तीन साल से जीआरपी थाना प्रभारी के पद पर तैनात वशिष्ठ का फरवरी में रिटायरमेंट है। सत्ताधारी दल के एक नेता के भारी दबाव के चलते एडीजी रेलवे रहते जावीद अहमद खुद इस नियम का पालन नहीं करा सके। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब वह इस आदेश के तहत 60 साल के हो रहे वशिष्ठ को थाने से हटवा सकेंगे।
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58 साल से ज्यादा उम्र के दरोगा और इंस्पेक्टर की थाना प्रभारी पद पर तैनाती नहीं करने का आदेश कई साल पुराना है। इसी तरह एक थाने में किसी सिपाही की तीन साल से ज्यादा वक्त तक तैनाती न करने का भी फरमान पुराना है। मगर सत्ताधारी नेताओं से सेटिंग रखने वाले दरोगाओं और सिपाहियों के लिए यह आदेश मायने नहीं रखता। नए डीजीपी जावीद अहमद ने सभी आईजी, डीआईजी, एसपी को सर्कुलर जारी कर इस आदेश का सख्ती से पालन करने के लिए कहा जरूर है, लेकिन इस पर अमल करने के लिए अधिकारियों को इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
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आलम यह है कि इलाहाबाद में मौजूदा समय में करेली, कीडगंज, सिविल लाइंस, दारागंज, कर्नलगंज, जार्जटाऊन, नैनी, धूमनगंज थाने और चौकियों में तीन साल से ज्यादा समय से तैनात कई सिपाही कारखास के तौर पर धन उगाही कर रहे हैं। कारखास यानी वे सिपाही जो थानेदार का चहेता होने की वजह से इलाके की सभी नाजायज वसूली और रोज तमाम मामलों में पैसों का लेनदेन करता है। वही जुआ-सट्टा के अड्डों से भी उगाही करते हैं। डीजीपी के आदेश के तहत इन सभी सिपाहियों का तबादला किया जाना चाहिए।
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58 साल की आयु पूरी कर चुके थानेदारों में कैंट थाना प्रभारी एमएम अंसारी, बारा थाना प्रभारी आरपी राय, नैनी इंस्पेक्टर रमेश पांडेय, मेजा थाना प्रभारी पीएन मिश्रा, झूंसी थाना प्रभारी रामदरश यादव, कर्नलगंज थाना प्रभारी सिद्धार्थ तोमर के नाम की चर्चा है। अब देखना यह है कि इनमें से कितने थानेदारों को आयु सीमा पार करने की वजह से हटाया जाएगा।
इस मामले में एक तथ्य यह भी है कि नए डीजीपी ने जिस आदेश का पालन करने का सर्कुलर जारी किया है, एडीजी रेलवे रहते खुद वह इसकी अनदेखी करते रहे। यूपी में जीआरपी थानों में इंस्पेक्टर को हटाने और तैनात करने में एडीजी रेलवे का हाथ होता है। उस लिहाज से उन्होंने एडीजी रहते इलाहाबाद के जीआरपी थाना प्रभारी वशिष्ठ सिंह यादव की उम्र को नजरंदाज किया।
तीन साल से जीआरपी थाना प्रभारी के पद पर तैनात वशिष्ठ का फरवरी में रिटायरमेंट है। सत्ताधारी दल के एक नेता के भारी दबाव के चलते एडीजी रेलवे रहते जावीद अहमद खुद इस नियम का पालन नहीं करा सके। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब वह इस आदेश के तहत 60 साल के हो रहे वशिष्ठ को थाने से हटवा सकेंगे।