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एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 09 Jan 2016 12:50 AM IST
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एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर शातिरों ने हाईकोर्ट के समीक्षा अधिकारी से एक लाख 35 हजार रुपये की ठगी कर ली। शातिरों ने समीक्षा अधिकारी को फर्जी लेटर थमा दिया। वे बाकी रकम की व्यवस्था में लगे थे तभी उन्हें पता चला कि यह संस्थान फर्जी है तो उन्होंने मोबाइल पर संपर्क किया। इसके बाद तो शातिरों ने वेबसाइट भी गायब कर दी। आखिरकार ठगी का पता चलने के बाद समीक्षा अधिकारी कैंट थाने पहुंचे। कैंट पुलिस ने खुद को डॉक्टर बताने वाले तीन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट लिखकर जांच शुरू कर दी है।
विवेक श्रीवास्तव में हाईकोर्ट में समीक्षा अधिकारी हैं। उनकी बेटी राजनंदिनी एमबीबीएस की तैयारी कर रही है। 12 दिसंबर को उनके मोबाइल पर एक एसएमएस आया। मैसेज हल्दिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की ओर से था। जिसमें एमबीबीएस के कोर्स में दाखिला बिना डोनेशन फीस से करने का जिक्र था। मैसेज पढ़कर विवेक ने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। बातचीत में संतुष्ट होने के बाद औपचारिक दाखिले के नाम पर विवेक ने बताई वेबसाइट को देखा। वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर बातचीत की तो शातिरों ने कहा कि दिए गए खाते में रकम जमा कर दें ताकि रजिस्ट्रेशन हो सके।
विवेक ने खाते में एसबीआई हाईकोर्ट शाखा से 1 लाख 35 हजार रुपये जमा कर दिए। रकम जमा करते ही दोबारा मोबाइल पर मैसेज आया। जिसमें 24 तारीख को अभ्यर्थी के साथ कॉलेज में बुलाया गया था। इसी दौरान जांच के बाद पता चला कि वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने चेतावनी दी थी कि उनकी ओर से ऐसा कोई कॉलेज मान्यता प्राप्त नहीं है। यह पता चलने पर विवेक ने भारतीय चिकित्सा परिषद की वेबसाइट पर इस कॉलेज को सर्च किया लेकिन यहां भी हल्दिया मेडिकल साइंसेज कॉलेज का जिक्र नहीं था।
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तब विवेक ने जिस नंबर पर पहले बातचीत कर चुके थे, संपर्क किया। तब बातचीत करने वाले शख्स डॉ. नीरज और कथित कॉलेज के प्रिसिंपल कल्याण मुखर्जी ने पहले तो विवेक को गुमराह किया लेकिन दो दिन बाद कॉलेज की वेबसाइट भी गायब हो गई। तब विवेक को पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है। इस पर कथित डॉक्टर नीरज, कल्याण मुखर्जी और एक अन्य अजय कुमार दुबे के खिलाफ धोखाधड़ी, कूट रचना समेत अन्य धाराओं में मुकदमा लिखा गया। इंस्पेक्टर कैंट एमएम अंसारी ने बताया कि विवेक की तहरीर पर मुकदमा लिखकर जांच की जा रही है।
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विवेक श्रीवास्तव में हाईकोर्ट में समीक्षा अधिकारी हैं। उनकी बेटी राजनंदिनी एमबीबीएस की तैयारी कर रही है। 12 दिसंबर को उनके मोबाइल पर एक एसएमएस आया। मैसेज हल्दिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की ओर से था। जिसमें एमबीबीएस के कोर्स में दाखिला बिना डोनेशन फीस से करने का जिक्र था। मैसेज पढ़कर विवेक ने दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। बातचीत में संतुष्ट होने के बाद औपचारिक दाखिले के नाम पर विवेक ने बताई वेबसाइट को देखा। वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर बातचीत की तो शातिरों ने कहा कि दिए गए खाते में रकम जमा कर दें ताकि रजिस्ट्रेशन हो सके।
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विवेक ने खाते में एसबीआई हाईकोर्ट शाखा से 1 लाख 35 हजार रुपये जमा कर दिए। रकम जमा करते ही दोबारा मोबाइल पर मैसेज आया। जिसमें 24 तारीख को अभ्यर्थी के साथ कॉलेज में बुलाया गया था। इसी दौरान जांच के बाद पता चला कि वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने चेतावनी दी थी कि उनकी ओर से ऐसा कोई कॉलेज मान्यता प्राप्त नहीं है। यह पता चलने पर विवेक ने भारतीय चिकित्सा परिषद की वेबसाइट पर इस कॉलेज को सर्च किया लेकिन यहां भी हल्दिया मेडिकल साइंसेज कॉलेज का जिक्र नहीं था।
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तब विवेक ने जिस नंबर पर पहले बातचीत कर चुके थे, संपर्क किया। तब बातचीत करने वाले शख्स डॉ. नीरज और कथित कॉलेज के प्रिसिंपल कल्याण मुखर्जी ने पहले तो विवेक को गुमराह किया लेकिन दो दिन बाद कॉलेज की वेबसाइट भी गायब हो गई। तब विवेक को पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है। इस पर कथित डॉक्टर नीरज, कल्याण मुखर्जी और एक अन्य अजय कुमार दुबे के खिलाफ धोखाधड़ी, कूट रचना समेत अन्य धाराओं में मुकदमा लिखा गया। इंस्पेक्टर कैंट एमएम अंसारी ने बताया कि विवेक की तहरीर पर मुकदमा लिखकर जांच की जा रही है।