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युवक के पेट से निकला अविकसित बच्चा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 04 Jan 2016 11:57 PM IST
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संगम नगरी के एक युवक के पेट में भ्रूण विकसित हो जाने का मामला सामने आया है। डॉक्टरों ने सर्जरी के जरिये युवक के पेट से उस अविकसित बच्चे को बाहर निकाल लिया है। मेडिकल साइंस के क्षेत्र में ऐसी बीमारी को ‘फिटस इन फिटू’ का नाम दिया गया है। दुनिया में अब तक ऐसे गिने-चुने मामले ही सामने आए हैं। इससे पूर्व 1999 में नागपुर के 36 वर्षीय एक युवक के साथ ऐसी घटना हुई थी। मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में उस युवक के पेट से अविकसित बच्चा निकाला गया था।
झलवा के पास स्थित ग्राम हरियमपुर, पोस्ट बीखपुर के रहने वाले 18 वर्षीय नरेंद्र कुमार के पेट से अविकसित बच्चा निकाला गया। उसकी सर्जरी करने वाले डॉ. राजीव का दावा है कि नरेंद्र जब अपनी मां के गर्भ में था, उसी वक्त मां के गर्भ में एक और भ्रूण बन गया जो नरेंद्र का जुड़वा था लेकिन ‘फिटस इन फिटू’ बीमारी के कारण दूसरा भ्रूण नरेंद्र के पेट में चला गया। जन्म के दौरान नरेंद्र के पेट के बाईं ओर सूजन थी लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। 18 साल की आयु तक नरेंद्र को अक्सर पेट दर्द, उल्टी की शिकायत रही। वह कई बार डॉक्टरों को के पास गया लेकिन पेट में विकसित हो रहे बच्चे को चिह्नित नहीं किया जा सका।
इसके बाद वह शहर के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित नारायण स्वरूप हॉस्पिटल पहुंचा। पहले उसका एक्सरे हुआ और फिर सीटी स्कैन कराया गया। इससे नरेंद्र के पेट में विकिसित हो रहे बच्चे की पहचान हुई। जांच के दौरान अविकसित बच्चे का सिर, दांत, रीढ़ की हड्डियां, सीने की हड्डियां, दो फिट तक लंबे बालों का गुच्छा पाया गया। डॉ. राजीव सिंह, डॉ. सोनिया सिंह, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. कमल सिंह ने मिलकर सर्जरी के जरिये युवक के पेट से उस अविकसित बच्चे को बाहर निकाला। नरेंद्र की हालत अब ठीक है। डॉ. राजीव का दावा है कि चिकित्सा जगत में इस तरह की घटनाएं बहुत की कम हुआ करती हैं। उनके मुताबिक दुनिया में अब तक इस तरह के कुल 90 मामले सामने आए हैं।
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झलवा के पास स्थित ग्राम हरियमपुर, पोस्ट बीखपुर के रहने वाले 18 वर्षीय नरेंद्र कुमार के पेट से अविकसित बच्चा निकाला गया। उसकी सर्जरी करने वाले डॉ. राजीव का दावा है कि नरेंद्र जब अपनी मां के गर्भ में था, उसी वक्त मां के गर्भ में एक और भ्रूण बन गया जो नरेंद्र का जुड़वा था लेकिन ‘फिटस इन फिटू’ बीमारी के कारण दूसरा भ्रूण नरेंद्र के पेट में चला गया। जन्म के दौरान नरेंद्र के पेट के बाईं ओर सूजन थी लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। 18 साल की आयु तक नरेंद्र को अक्सर पेट दर्द, उल्टी की शिकायत रही। वह कई बार डॉक्टरों को के पास गया लेकिन पेट में विकसित हो रहे बच्चे को चिह्नित नहीं किया जा सका।
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इसके बाद वह शहर के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित नारायण स्वरूप हॉस्पिटल पहुंचा। पहले उसका एक्सरे हुआ और फिर सीटी स्कैन कराया गया। इससे नरेंद्र के पेट में विकिसित हो रहे बच्चे की पहचान हुई। जांच के दौरान अविकसित बच्चे का सिर, दांत, रीढ़ की हड्डियां, सीने की हड्डियां, दो फिट तक लंबे बालों का गुच्छा पाया गया। डॉ. राजीव सिंह, डॉ. सोनिया सिंह, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. कमल सिंह ने मिलकर सर्जरी के जरिये युवक के पेट से उस अविकसित बच्चे को बाहर निकाला। नरेंद्र की हालत अब ठीक है। डॉ. राजीव का दावा है कि चिकित्सा जगत में इस तरह की घटनाएं बहुत की कम हुआ करती हैं। उनके मुताबिक दुनिया में अब तक इस तरह के कुल 90 मामले सामने आए हैं।
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