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संतों ने दी माघ मेले के बहिष्कार की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 31 Dec 2015 11:57 PM IST
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गंगा का जल स्तर कम होने और उसमें लगातार प्रदूषण बढ़ने से संत अक्रोशित हैं। उन्होंने मेला प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे मेले का बहिष्कार भी कर सकते हैं। इस मसले पर संतों ने प्रदेश सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार मेले पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है।
अखिल भारतीय दंडी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष स्वामी विमलदेव आश्रम एवं महामंत्री स्वामी ब्रह्माश्रम की अध्यक्ष में बृहस्पतिवार को मेला क्षेत्र में साधु-संतों की बैठक हुई। संतों ने गंगा में पर्याप्त जल न होने और प्रदूषण बढ़ने पर आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कमिश्नर और डीएम सहित अन्य अधिकारी रोज दावा कर रहे हैं कि नरौरा से चार हजार क्यूसेक जल छोड़ा गया है और जल कहां गया, इसका जवाब उनके पास नहीं। कानपुर की टेनरियों से बिना शोधन गंदगी गंगा में छोड़े जाने से स्थिति और बिगड़ गई है। वहीं, इलाहाबाद में भी कई नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं।
स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने कहा कि अफसरों के रवैये से गंगा की हालत लगातार खराब हो रही है। इसके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है। खाक चौक के महामंत्री सतुआ बाबा ने कहा कि प्रदेश सरकार मेले को गंभीरता से नहीं ले रही है। एक हफ्ते में हालात नहीं सुधरे तो साधु-संत आंदोलन को और तीव्र करने के लिए बाध्य होंगे। बैठक में शामिल महामंडलेश्वर मनोहर दास जयपुर वाले, क्रिया योग आश्रम की महासचिव ज्ञानमाता डॉ. राधा सत्यम, महामंडलेश्वर कपिलदेव नागा ने भी गंगा की हालत पर आक्रोश जताया और शीघ्र पर्याप्त जल न आने पर व्यापक पैमाने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।
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अखिल भारतीय दंडी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष स्वामी विमलदेव आश्रम एवं महामंत्री स्वामी ब्रह्माश्रम की अध्यक्ष में बृहस्पतिवार को मेला क्षेत्र में साधु-संतों की बैठक हुई। संतों ने गंगा में पर्याप्त जल न होने और प्रदूषण बढ़ने पर आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कमिश्नर और डीएम सहित अन्य अधिकारी रोज दावा कर रहे हैं कि नरौरा से चार हजार क्यूसेक जल छोड़ा गया है और जल कहां गया, इसका जवाब उनके पास नहीं। कानपुर की टेनरियों से बिना शोधन गंदगी गंगा में छोड़े जाने से स्थिति और बिगड़ गई है। वहीं, इलाहाबाद में भी कई नाले सीधे गंगा में गिर रहे हैं।
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स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी ने कहा कि अफसरों के रवैये से गंगा की हालत लगातार खराब हो रही है। इसके अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया है। खाक चौक के महामंत्री सतुआ बाबा ने कहा कि प्रदेश सरकार मेले को गंभीरता से नहीं ले रही है। एक हफ्ते में हालात नहीं सुधरे तो साधु-संत आंदोलन को और तीव्र करने के लिए बाध्य होंगे। बैठक में शामिल महामंडलेश्वर मनोहर दास जयपुर वाले, क्रिया योग आश्रम की महासचिव ज्ञानमाता डॉ. राधा सत्यम, महामंडलेश्वर कपिलदेव नागा ने भी गंगा की हालत पर आक्रोश जताया और शीघ्र पर्याप्त जल न आने पर व्यापक पैमाने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी।
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