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स्वरूपानंद को मिली ज्योतिष्पीठ की जमीन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 30 Dec 2015 11:51 PM IST
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ज्योतिष्पीठ का स्वामित्व तय होने के बाद प्रशासन ने बुधवार को माघ मेले में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की जमीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को आवंटित कर दी। जमीन के साथ पीठ के नाम पर मिलने वाली सुविधाएं भी स्वरूपानंद सरस्वती के खाते में आ जाएंगी। भूमि आवंटन के दौरान दोनों पक्षों के लोग मौजूद थे। मेला प्रबंधक ने उन्हें प्रशासन के फैसले से अवगत कराते हुए जमीन आवंटन को अंतिम रूप दिया। हालांकि वासुदेवानंद सरस्वती के समर्थकों ने इसका विरोध करते हुए प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया है।
ज्योतिष्पीठ का स्वामित्व तय होने से पहले माघ मेले के त्रिवेणी मार्ग पर ज्योतिष्पीठ के नाम पर वासुदेवानंद सरस्वती को 200 गुणा 200 वर्ग फीट और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को 200 गुणा 160 वर्ग फीट जमीन मिलती थी। कोर्ट के निर्णय के बाद ज्योतिष्पीठ का स्वामित्व शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के पक्ष में चला गया।
बता दें, माघ मेले से पहले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मेला प्रशासन को पत्र जारी कर वासुदेवानंद सरस्वती को ज्योतिष्पीठ के नाम पर मिलने वाली जमीन पर दावा किया था। मामला विवादित और पेचीदा था, सो डीएम ने इस पर विधिक राय ली। मुख्य स्थायी अधिवक्ता से मिली सलाह के बाद प्रशासन ने वासुदेवानंद सरस्वती की जमीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को देने का निर्णय लिया।
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बुधवार को दोनों पक्षों को मौके पर बुलाया गया, जहां मेला प्रबंधक सुशील चौबे ने उन्हें प्रशासन के फैसले से अवगत कराया और इसके बाद जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी की गई। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की जमीन का क्षेत्रफल बढ़कर अब 400 गुणा 160 वर्ग फीट हो गया है। इसके अलावा जमीन पर स्विस कॉटेज सहित जो अन्य सुविधा मिलती थीं, वह भी अब स्वरूपानंद सरस्वती को मिलेंगी। प्रशासन के निर्णय पर विरोध जताते हुए वासुदेनानंद सरस्वती के प्रवक्ता ओंकारनाथ त्रिपाठी ने कहा कि इस मसले पर बुधवार को कमिश्नर राजन शुक्ला से फोन पर बात हुई है, उन्होंने बृहस्पतिवार को मिलने का वक्त दिया है। वासुदेनानंद सरस्वती के प्रतिनिधियों ने कमिश्नर से वार्ता और उनके स्तर से आदेश जारी होने तक भूमि आवंटन रोकने की मांग की थी लेकिन प्रशासन नहीं माना। इस मसले पर कमिश्नर से वार्ता के बाद निर्णय लिया जाएगा कि आगे क्या करना है।
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ज्योतिष्पीठ का स्वामित्व तय होने से पहले माघ मेले के त्रिवेणी मार्ग पर ज्योतिष्पीठ के नाम पर वासुदेवानंद सरस्वती को 200 गुणा 200 वर्ग फीट और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को 200 गुणा 160 वर्ग फीट जमीन मिलती थी। कोर्ट के निर्णय के बाद ज्योतिष्पीठ का स्वामित्व शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के पक्ष में चला गया।
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बता दें, माघ मेले से पहले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने मेला प्रशासन को पत्र जारी कर वासुदेवानंद सरस्वती को ज्योतिष्पीठ के नाम पर मिलने वाली जमीन पर दावा किया था। मामला विवादित और पेचीदा था, सो डीएम ने इस पर विधिक राय ली। मुख्य स्थायी अधिवक्ता से मिली सलाह के बाद प्रशासन ने वासुदेवानंद सरस्वती की जमीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को देने का निर्णय लिया।
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बुधवार को दोनों पक्षों को मौके पर बुलाया गया, जहां मेला प्रबंधक सुशील चौबे ने उन्हें प्रशासन के फैसले से अवगत कराया और इसके बाद जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी की गई। शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की जमीन का क्षेत्रफल बढ़कर अब 400 गुणा 160 वर्ग फीट हो गया है। इसके अलावा जमीन पर स्विस कॉटेज सहित जो अन्य सुविधा मिलती थीं, वह भी अब स्वरूपानंद सरस्वती को मिलेंगी। प्रशासन के निर्णय पर विरोध जताते हुए वासुदेनानंद सरस्वती के प्रवक्ता ओंकारनाथ त्रिपाठी ने कहा कि इस मसले पर बुधवार को कमिश्नर राजन शुक्ला से फोन पर बात हुई है, उन्होंने बृहस्पतिवार को मिलने का वक्त दिया है। वासुदेनानंद सरस्वती के प्रतिनिधियों ने कमिश्नर से वार्ता और उनके स्तर से आदेश जारी होने तक भूमि आवंटन रोकने की मांग की थी लेकिन प्रशासन नहीं माना। इस मसले पर कमिश्नर से वार्ता के बाद निर्णय लिया जाएगा कि आगे क्या करना है।