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ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से पांच हजार करोड़ की वसूली पर रोक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 24 Dec 2015 12:04 AM IST
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ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट ने आयकर विभाग द्वारा जारी पांच हजार करोड़ रुपये की वसूली नोटिस पर रोक लगा दी है। रोक अंतरिम रूप से लगाई गई है। कोर्ट ने आयकर विभाग को अपना पक्ष रखने के लिए दस दिन की मोहलत दी है। इस मामले पर 21 जनवरी को अगली सुनवाई होगी। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की ओर से याचिका दाखिल कर वसूली नोटिस को चुनौती दी गई है।
अथॉरिटी का पक्ष रखने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री और सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम उपस्थित थे। याचिका पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति वीके बिड़ला की खंडपीठ ने सुनवाई की। वकीलों ने तर्क दिया कि आयकर अधिनियम के तहत अथॉरिटी को छूट प्राप्त है। अथॉरिटी को वर्ष 2007-08 और वर्ष 2011-2012 के आयकर का असेसमेंट करने के बाद नोटिस दिया गया। इसके खिलाफ अपील दाखिल की गई जिसे विभाग ने रद्द कर दिया। अथॉरिटी ने ट्रिब्यूनल में अपील की, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
हाईकोर्ट ने भी ट्रिब्यूनल के आदेश को सही मानते हुए असेसमेंट की कार्यवाही रद्द कर दी। इसके बाद आयकर विभाग ने उन्हीं आधारों पर दोबारा नोटिस जारी कर दिया। इस बार आयकर की धारा 143 के तहत नोटिस न देकर धारा 148 का नोटिस दिया गया। नोटिस में वर्ष 2011-12 का अससमेंट करने को कहा गया है जबकि अथॉरिटी 2013 में रिटर्न भर चुकी है। आयकर विभाग के वकीलों ने याचिका का विरोध करते हुए नोटिस भेजने को सही ठहराया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद वसूली नोटिस पर अंतरिम रूप से रोक लगाते हुए आयकर विभाग से जवाब मांगा है।
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अथॉरिटी का पक्ष रखने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री और सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम उपस्थित थे। याचिका पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति वीके बिड़ला की खंडपीठ ने सुनवाई की। वकीलों ने तर्क दिया कि आयकर अधिनियम के तहत अथॉरिटी को छूट प्राप्त है। अथॉरिटी को वर्ष 2007-08 और वर्ष 2011-2012 के आयकर का असेसमेंट करने के बाद नोटिस दिया गया। इसके खिलाफ अपील दाखिल की गई जिसे विभाग ने रद्द कर दिया। अथॉरिटी ने ट्रिब्यूनल में अपील की, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
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हाईकोर्ट ने भी ट्रिब्यूनल के आदेश को सही मानते हुए असेसमेंट की कार्यवाही रद्द कर दी। इसके बाद आयकर विभाग ने उन्हीं आधारों पर दोबारा नोटिस जारी कर दिया। इस बार आयकर की धारा 143 के तहत नोटिस न देकर धारा 148 का नोटिस दिया गया। नोटिस में वर्ष 2011-12 का अससमेंट करने को कहा गया है जबकि अथॉरिटी 2013 में रिटर्न भर चुकी है। आयकर विभाग के वकीलों ने याचिका का विरोध करते हुए नोटिस भेजने को सही ठहराया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद वसूली नोटिस पर अंतरिम रूप से रोक लगाते हुए आयकर विभाग से जवाब मांगा है।
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