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रुपये की ‘कमजोरी’से तेजी से नहीं गिर रहे दाम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 10 Dec 2015 12:43 AM IST
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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पिछले 11 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। बावजूद इसके खुदरा बाजार में पेट्रोल एवं डीजल की कीमत में ज्यादा गिरावट के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। जानकारों की नजर में डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। इसी वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में अप्रत्याशित गिरावट होने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम अपेक्षाकृत कम नहीं हो रहे हैं। 15 दिसंबर तक पेट्रोल-डीजल के दाम में एक रुपये तक की गिरावट संभव है।
सात दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 38.61 डॉलर प्रति बैरल रही। इसके पूर्व इतनी कीमत नवंबर 2004 में 38.62 डॉलर प्रति बैरल थी। ग्यारह वर्ष बाद इतनी कम कीमत होेने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम वर्ष 2004 वाले क्यों नहीं हुए, इसे लेकर तमाम लोग चर्चाएं कर रहे हैं। तकरीबन सात वर्ष पहले 2008 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत उच्चतम स्तर पर 145.85 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी। हालांकि तब पेट्रोल के दाम 55 रुपये प्रति लीटर के आसपास थे। अब जब कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में 38 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गए है तब भी पेट्रोल की कीमत इलाहाबाद समेत यूपी के तमाम शहरों में 67 रुपये प्रति लीटर के करीब है।
बता दें, नवंबर 2004 में पेट्रोल की कीमत 40 रुपये लीटर के करीब थी। अब 11 वर्षों के दौरान इसकी कीमत तकरीबन 27 रुपये बढ़ गई है। जानकारों के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। वर्ष 2004 में एक डॉलर की कीमत तकरीबन 44 रुपये थी जबकि अब बढ़कर तकरीबन 67 रुपये हो गई है। इससे इंटरनेशनल मार्केट में अप्रत्याशित रूप से कच्चे तेल के दाम में गिरावट के बाद भी देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा नहीं गिरी हैं। वहीं केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लिए जा रहे तमाम टैक्स भी लोगों की जेब ढीली कर रहे हैं। ऑयल कंपनियां रिफाइनरी से तकरीबन 30 रुपये प्रति लीटर तेल खरीद रही हैं जबकि कंपनी डीलर को लगभग 32 रुपये प्रति लीटर से हिसाब से देती हैं। इसके अलावा उत्पाद शुल्क, उपकर, डीलर कमीशन और वैट आदि की वजह से भी तेल के दाम नहीं गिर पा रहे हैं।
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सात दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 38.61 डॉलर प्रति बैरल रही। इसके पूर्व इतनी कीमत नवंबर 2004 में 38.62 डॉलर प्रति बैरल थी। ग्यारह वर्ष बाद इतनी कम कीमत होेने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम वर्ष 2004 वाले क्यों नहीं हुए, इसे लेकर तमाम लोग चर्चाएं कर रहे हैं। तकरीबन सात वर्ष पहले 2008 में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत उच्चतम स्तर पर 145.85 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी। हालांकि तब पेट्रोल के दाम 55 रुपये प्रति लीटर के आसपास थे। अब जब कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में 38 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गए है तब भी पेट्रोल की कीमत इलाहाबाद समेत यूपी के तमाम शहरों में 67 रुपये प्रति लीटर के करीब है।
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बता दें, नवंबर 2004 में पेट्रोल की कीमत 40 रुपये लीटर के करीब थी। अब 11 वर्षों के दौरान इसकी कीमत तकरीबन 27 रुपये बढ़ गई है। जानकारों के मुताबिक डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। वर्ष 2004 में एक डॉलर की कीमत तकरीबन 44 रुपये थी जबकि अब बढ़कर तकरीबन 67 रुपये हो गई है। इससे इंटरनेशनल मार्केट में अप्रत्याशित रूप से कच्चे तेल के दाम में गिरावट के बाद भी देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा नहीं गिरी हैं। वहीं केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लिए जा रहे तमाम टैक्स भी लोगों की जेब ढीली कर रहे हैं। ऑयल कंपनियां रिफाइनरी से तकरीबन 30 रुपये प्रति लीटर तेल खरीद रही हैं जबकि कंपनी डीलर को लगभग 32 रुपये प्रति लीटर से हिसाब से देती हैं। इसके अलावा उत्पाद शुल्क, उपकर, डीलर कमीशन और वैट आदि की वजह से भी तेल के दाम नहीं गिर पा रहे हैं।
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