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नवजात लावारिस बच्चों के मामलों पर हाईकोर्ट सख्त
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 20 Jul 2015 11:43 PM IST
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प्रदेश में नवजात बच्चों को लोक लाज के डर से सड़कों पर अथवा कूड़ों के ढेर में फेंक देने की बढ़ रही घटनाओं को रोकने के लिए सरकार के प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास द्वारा जारी निर्देशों को कड़ाई से पालन कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है। प्रमुख सचिव ने सभी जिलाधिकारियों व पुलिस प्रमुखों को आदेश जारी कर क हा है कि जैसे ही कोई लावारिस बच्चा अनजान अथवा निर्जन स्थान पर मिले तत्काल उसे लाकर पालना में रखा जाए तथा उसे संबंधित बाल गृहों में लालन-पालन के लिए भेज दिया जाए।
कोर्ट ने कहा है प्रत्येक जिलों के डीएम सरकार के इस फरमान का कड़ाई से पालन करें तथा प्रत्येक तीन माह में इस संबंध में अपनी रिपोर्ट शासन को भेजें।यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डॉ. डी वाई चंद्रचूड़ व न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने विधि छात्र अर्जुन सिंह यादव की जनहित याचिका पर दिया है। नवजात लावारिस बच्चों की सुरक्षा व उनके पलान पोषण को लेकर दायर जनहित याचिका में सरकार का कहना है कि ऐसे बच्चों की सूचना मिलते ही उन्हें किशोर न्याय अधिनियम,2000 के प्रावधानों के अन्तर्गत बच्चों को बाल गृह में रखने की व्यवस्था है। यही नहीं परित्यक्त, नवजात शिशुओं के जीवन रक्षा के लिए पालना शिशु स्वागत केंद्र की संकल्पना की गयी है।
कहा गया है कि प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से अपेक्षा की है कि समस्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वाधार गृहों, बाल गृहों एवं जिला बाल संरक्षण कार्यालय में पालना शिशु स्वागत केंद्र की स्थापना की जाए। कहा गया था कि समस्त जनपदों में बाल कल्याण समिति गठित कर उसका संचालन हो रहा है। याचिका पर अधिवक्ता आरपी सिन्हा ने पक्ष रखा।
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कोर्ट ने कहा है प्रत्येक जिलों के डीएम सरकार के इस फरमान का कड़ाई से पालन करें तथा प्रत्येक तीन माह में इस संबंध में अपनी रिपोर्ट शासन को भेजें।यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डॉ. डी वाई चंद्रचूड़ व न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने विधि छात्र अर्जुन सिंह यादव की जनहित याचिका पर दिया है। नवजात लावारिस बच्चों की सुरक्षा व उनके पलान पोषण को लेकर दायर जनहित याचिका में सरकार का कहना है कि ऐसे बच्चों की सूचना मिलते ही उन्हें किशोर न्याय अधिनियम,2000 के प्रावधानों के अन्तर्गत बच्चों को बाल गृह में रखने की व्यवस्था है। यही नहीं परित्यक्त, नवजात शिशुओं के जीवन रक्षा के लिए पालना शिशु स्वागत केंद्र की संकल्पना की गयी है।
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कहा गया है कि प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से अपेक्षा की है कि समस्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वाधार गृहों, बाल गृहों एवं जिला बाल संरक्षण कार्यालय में पालना शिशु स्वागत केंद्र की स्थापना की जाए। कहा गया था कि समस्त जनपदों में बाल कल्याण समिति गठित कर उसका संचालन हो रहा है। याचिका पर अधिवक्ता आरपी सिन्हा ने पक्ष रखा।
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