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टीईटी-2011 के टीआर अभिलेख में हेराफेरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 20 Jul 2015 11:42 PM IST
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यूपी बोर्ड की ओर से 2011 में प्रदेश में पहली बार हुई टीईटी के घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। टीईटी-2011 के टीआर अभिलेख में हेराफेरी के आरोप में बोर्ड के सचिव अमरनाथ वर्मा ने अभिलेख विभाग के प्रधान सहायक बृजनंदन एवं वरिष्ठ सहायक संतोष श्रीवास्तव पर निलंबन की कार्रवाई की है। सचिव ने इन दो कर्मचारियों को निलंबित करने के साथ ही अपर सचिव प्रशासन राजेंद्र प्रसाद को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2011 में अंकों की हेराफेरी के आरोप के बाद तत्कालीन निदेशक से लेकर बोर्ड सचिव तक को जांच के घेरे में आना पड़ा था। इस जांच में तत्कालीन निदेशक संजय मोहन को जेल भी जाना पड़ा था। टीईटी-2011 के मामले जांच लंबित होने के कारण उसका पूरा रिजल्ट सील कर दिया गया था। टीईटी-2011 के आधार पर इस समय 72,825 शिक्षकों की भर्ती चल रही है। इस कारण से अभ्यर्थियों की मांग पर जांच एजेंसी से बोर्ड को रिजल्ट की सीडी मिली तो अभिलेख विभाग ने कंप्यूटर एजेंसी के जरिए टीआर शीट तैयार करवाई तो इसमें बोर्ड के इन कर्मचारियों की मिलीभगत से लगभग पांच सौ परीक्षार्थियों को गलत तरीके से शामिल करने की जानकारी हुई। टीआर अभिलेख में भी हेराफेरी का आरोप सामने आने के बाद एक बार फिर से 72,825 शिक्षकों की भर्ती विवाद के घेरे में आ सकती है।
बोर्ड सचिव ने भले ही आननफानन में टीआर शीट की हेराफेरी में दो बाबुओं को जिम्मेदार बताकर उन्हें निलंबित कर दिया हो, लेकिन यह तो बड़ा सवाल है कि क्या सिर्फ बाबुओं के इशारे पर कोई भी एजेंसी टीआर शीट में हेराफेरी कर सकती है। ऐसे में पूरे मामले में अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। बोर्ड के सचिव सहित अन्य अधिकारियों की जवाबदेही भी इस मामले में बनती है। सचिव अमर नाथ वर्मा का कहना है कि इस मामले की जांच के लिए अपर सचिव प्रशासन राजेंद्र प्रसाद को जांच अधिकारी बनाया गया है।
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शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2011 में अंकों की हेराफेरी के आरोप के बाद तत्कालीन निदेशक से लेकर बोर्ड सचिव तक को जांच के घेरे में आना पड़ा था। इस जांच में तत्कालीन निदेशक संजय मोहन को जेल भी जाना पड़ा था। टीईटी-2011 के मामले जांच लंबित होने के कारण उसका पूरा रिजल्ट सील कर दिया गया था। टीईटी-2011 के आधार पर इस समय 72,825 शिक्षकों की भर्ती चल रही है। इस कारण से अभ्यर्थियों की मांग पर जांच एजेंसी से बोर्ड को रिजल्ट की सीडी मिली तो अभिलेख विभाग ने कंप्यूटर एजेंसी के जरिए टीआर शीट तैयार करवाई तो इसमें बोर्ड के इन कर्मचारियों की मिलीभगत से लगभग पांच सौ परीक्षार्थियों को गलत तरीके से शामिल करने की जानकारी हुई। टीआर अभिलेख में भी हेराफेरी का आरोप सामने आने के बाद एक बार फिर से 72,825 शिक्षकों की भर्ती विवाद के घेरे में आ सकती है।
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बोर्ड सचिव ने भले ही आननफानन में टीआर शीट की हेराफेरी में दो बाबुओं को जिम्मेदार बताकर उन्हें निलंबित कर दिया हो, लेकिन यह तो बड़ा सवाल है कि क्या सिर्फ बाबुओं के इशारे पर कोई भी एजेंसी टीआर शीट में हेराफेरी कर सकती है। ऐसे में पूरे मामले में अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। बोर्ड के सचिव सहित अन्य अधिकारियों की जवाबदेही भी इस मामले में बनती है। सचिव अमर नाथ वर्मा का कहना है कि इस मामले की जांच के लिए अपर सचिव प्रशासन राजेंद्र प्रसाद को जांच अधिकारी बनाया गया है।
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