फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   allahabad news

नवंबर ही नहीं, दिसंबर में भी औसत से अधिक तापमान

Mon, 07 Dec 2015 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 07 Dec 2015 11:20 PM IST
विज्ञापन
allahabad news
बीते दो दिनों से कोहरे और ठंड ने भले ही दस्तक दे दी हो लेकिन शहरियों का मानना है कि दिसंबर में भी पहले जैसी ठंड नहीं रही। चेन्नई में हुई जोरदार बारिश और नवंबर-दिसंबर के तापमान ने शहरियों की चिंता बढ़ा दी है लेकिन यह अकारण नहीं है। बीते दो वर्षों के दौरान हुई कम बारिश और नवंबर-दिसंबर में भी आमतौर पर पड़ने वाली कड़ाके की ठंड न पड़ना है।
विज्ञापन


 इन दो महीनों का शहर का तापमान औसत से लगातार ऊंचा बना हुआ है। नवंबर में जहां यह सामान्य से चार से पांच डिग्री सेल्सियस अधिक था वहीं दिसंबर में भी दो से तीन डिग्री सेल्सियस तापमान अधिक रिकार्ड किया गया। मौसम विज्ञानी इसे खतरे के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि शहर का मौसम ग्लोबल वार्मिंग से ही नहीं बल्कि स्थानीय कारकों से भी बुरी तरह से प्रभावित हो चुका है। आने वाले दिनों में इसके भयावह परिणाम सामने आ सकते हैं।
विज्ञापन



मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में दिन का अधिकतम तापमान जहां 30 डिग्री सेल्सियस लगातार बना हुआ था वहीं न्यूनतम तापमान भी 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही रिकार्ड किया गया। यहीं हाल दिसंबर के शुरुआती तीन दिनों में भी रहा। सोमवार को रिकार्ड किया गया न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस भी ग्लोबल वार्मिंग और कई स्थानीय कारकों से औसत से दो डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। दिसंबर के प्रथम सप्ताह में न्यूनतम तापमान औसतन आठ डिग्री सेल्सियस पर रहता है लेकिन इस बार सारे मानक उलट गए हैं। ठंड डेढ़ महीने देर से शुरू हुई लेकिन अब तक ठिठुरन नहीं पैदा कर सकी है। घर के भीतर लोग सामान्य कपड़ों में हैं। रात में उन्हें रजाई की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन



हालांकि बाहर निकलने पर उन्हें थोड़ा गर्म कपड़ों की जरूरत पड़ रही है। कुल मिलाकर दिसंबर में एक सप्ताह बीतने के बावजूद कड़कड़ाती ठंड नहीं आई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि यह तो नवंबर वाली ठंड है। दिसंबर में तो सुबह घना कोहरा और टपकती ओस की बूंदे लोगों को भीतर तक कंपा देती थीं। अभी ऐसी ठंड नहीं आई है। इसके  पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था, जैसे अबकी बार है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ.अनुपम पांडेय कहते हैं कि शहर के मौसम का ऐसा हाल ग्लोबल वार्मिंग, निमभन वायुदाब क् बने रहना, पेड़ों की कटाई और तेजी से बन रहीं ऊंची-ऊंची इमारतों के प्रभाव के कारण हैं। प्रकृति और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करते लोग अब भी सचेत नहीं हुए तो इसके और भयानक परिणाम सामने आ सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed