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न जाम से निजात और न ही सुधरे हालात
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 01 Dec 2015 11:59 PM IST
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ट्रैफिक पुलिस नवंबर महीने को ट्रैफिक माह के रूप में मनाती है लेकिन एक महीने बाद भी शहर के हालात नहीं सुधरे। शहरियों को न जाम से निजात मिली और न ही ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार हुआ। पूरा अभियान सिर्फ कागजों पर ही नजर आया। शहर की सड़कों पर आज भी वही हालात बने हैं।
ट्रैफिक पुलिस लगभग 13 हजार वाहनों पर कार्रवाई और 62 लाख रुपये जुर्माना वसूलने के बाद अपनी पीठ थपथपा रही है। महीने भर ट्रैफिक पुलिस ने चौराहों पर लोगों को पम्फलेट बांटे, रैली, गोष्ठी कर जागरूक किया। स्कूलों में जाकर ट्रैफिक नियमों का का पाठ पढ़ाया। नुक्कड़ नाटक, डांस, वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। शहर के प्रमुख इलाकों में आज भी सड़कों पर जाम लगा रहता है। सौ कदम की दूरी तय करने में घंटों लग जाता है। अवैध पार्किंग से भी ट्रैफिक माह में निजात नहीं मिल सकी। ट्रैफिक पुलिस का पूरा ध्यान वाहन चेकिंग, चालान और वसूली पर ही रहा। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की जहमत ही नहीं उठाई गई।
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ट्रैफिक पुलिस लगभग 13 हजार वाहनों पर कार्रवाई और 62 लाख रुपये जुर्माना वसूलने के बाद अपनी पीठ थपथपा रही है। महीने भर ट्रैफिक पुलिस ने चौराहों पर लोगों को पम्फलेट बांटे, रैली, गोष्ठी कर जागरूक किया। स्कूलों में जाकर ट्रैफिक नियमों का का पाठ पढ़ाया। नुक्कड़ नाटक, डांस, वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। पर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। शहर के प्रमुख इलाकों में आज भी सड़कों पर जाम लगा रहता है। सौ कदम की दूरी तय करने में घंटों लग जाता है। अवैध पार्किंग से भी ट्रैफिक माह में निजात नहीं मिल सकी। ट्रैफिक पुलिस का पूरा ध्यान वाहन चेकिंग, चालान और वसूली पर ही रहा। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की जहमत ही नहीं उठाई गई।
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