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रेप की रिपोर्ट दर्ज नहीं करने पर नपेंगे दरोगा

Wed, 27 May 2015 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद Updated Wed, 27 May 2015 11:49 PM IST
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हाईकोर्ट ने महिला उत्पीड़न के मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता के संशोधित प्रावधानों का पालन नहीं होने पर गहरी चिंता जताई है। प्रदेश सरकार से कहा है कि वह इन प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करे। प्रमुख सचिव गृह को इस बाबत चार सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट व्यक्तिगत हलफनामे के साथ अदालत में पेश करनी होगी। संहिता की संशोधित धारा 154(1) में रेप या उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने वाली महिला की रिपोर्ट महिला अधिकारी द्वारा ही लिखे जाने तथा इसकी वीडियोग्राफी कराने की व्यवस्था की गई है। यह बाध्यकारी प्रावधान है जिसका पालन करने के लिए सरकार और पुलिस बाध्य है। रिपोर्ट दर्ज नहीं करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (आईपीसी)के तहत कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
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याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की खंडपीठ ने प्रमुख सचिव गृह को इस प्रावधान के अनुपालन का निर्देश दिया है। गुड़िया सामाजिक सेवा संस्थान द्वारा दाखिल जनहित याचिका में अदालत का ध्यान इस महत्वपूर्ण कमी की ओर दिलाया गया कि प्रदेश में कहीं पर भी धारा 154(1) का पालन नहीं किया जा रहा है। याची संस्था के वकीलों राजकुमार और गोपाल कृष्ण ने याचिका में प्रमाण के तौर पर 108 ऐसी प्राथमिकी प्रस्तुत की, जिनमें दुराचार, यौन उत्पीड़न या पॉक्सो के तहत रिपोर्ट दर्ज करने से इंकार किया गया। बाद में यह रिपोर्ट अदालत में 156(3) के तहत दाखिल अर्जी पर दिए आदेश के तहत दर्ज हुई।
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 याची का कहना था कि अधिकांश शिकायतें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप या अदालत के आदेश पर दर्ज होती है। सीआरपीसी 154(1) में प्रावधान है कि यदि कोई पुलिस अधिकारी रेप या उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज करने से इंकार करता है तो उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 66 (ए) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। याची ने 68 ऐसी प्राथमिकी अदालत के सामने पेश की, जिनमें महिला की शिकायत पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा दर्ज की गई है। किसी भी एक मामले में वीडियो रिकार्डिंग नहीं कराई गई है। याचिका पर 15 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।
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