फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   allahabad news

आम बजट: कहीं खुशी, कहीं गम

Tue, 01 Mar 2016 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Tue, 01 Mar 2016 01:52 AM IST
विज्ञापन
वित्तमंत्री की ओर से पेश 2016 का आम बजट सुशासन की ओर ले जाने का शुभ संकेत दे रहा है। बजट में देश की रीढ़ कहे जाने वाले ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है।कृषि आधारित उद्योगों खाद्य प्रसंस्करण आदि पर 100 फीसदी विदेशी पूंजी निवेश की बात कही गई है। इस पूंजी निवेश से हमारे किसानों के फसल उत्पाद को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा। इस पूंजी से शीत गृह सहित अन्य संरक्षण के उपक्रम खोले जा सकेंगे।  आर्थिक वृद्धि दर को वृद्धि दर से जोड़े जाने के बाद विकास में तेजी आएगी। इस बजट में शिक्षा ग्रामीण विकास के साथ सड़क एवं बिजली के लिए भी धन की व्यवस्था की गई है। नए राजमार्ग बनाने के साथ पुराने के चौड़ीकरण एवं रख-रखाव के लिए धन की व्यवस्था की गई है। यह बजट अमीर के पक्ष में नहीं बल्कि आमजन को मजबूती देने वाला है। इसमें कारपोरेट पर टैक्स लगाकर उनसे वसूली का रास्ता खुला रखा गया है। यह  बजट रोजगार देने वाला है, जब रोजगार मिलेगा तो समृद्धि आएगी। स्किल डेवलपमेंट के जरिए युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार के रास्ते खुलेंगे।
विज्ञापन

प्रो. पीएन मेहरोत्रा
जाने-माने अर्थशास्त्री एवं प्रोफेसर इलाहाबाद विश्वविद्यालय

उत्पादों पर सही मूल्य नहीं मिलने से बढ़ रही खाई
आम बजट में किसानों एवं कृषि आधारित उद्योगों पर विशेष घोषणा की गई है। बजट में दी गई सुविधा का लाम किसानों एवं ग्रामीण जनता तक पहुंचाने के लिए हमें पहले उनके उत्पादों पर सही मूल्य दिलाना होगा। ग्रामीण जनता के उत्पादों पर सही मूल्य दिलाए बिना हम अमीर-गरीब के बीच की खाई को कम नहीं कर सकते हैं। सरकार की ओर से की गई घोषणा मात्र कागजी रह जाएगी। बिचौलियों की भूमिका को कम करके सरकार को किसानों से सीधे उनके उत्पाद खरीदने के लिए आगे आना होगा। इससे उन्हें लागत मूल्य सही मिल सकेगा। सरकार को बिचौलियों की भूमिका कम करके वितरण की व्यवस्था को भी सुधारना होगा। कृषि सब्सिडी का लाभ आम किसान तक पहुंचाना होगा। मनरेगा सहित अन्य योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचे, इसके लिए सही मॉनीटरिंग करनी होगी। भूमि के अधिग्रहण एवं भूगर्भ जल का स्तर नीचे जाने से किसान परेशान हैं।
विज्ञापन

प्रो. ए सत्यनारायण,
जाने-माने समाजशास्त्री, पूर्व कुलपति इविवि
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed