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कचरी में किसान नजरबंद

Sat, 27 Feb 2016 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 27 Feb 2016 01:10 AM IST
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करछना के कचरी गांव में रहने वाले किसान नजरबंद कर दिए गए हैं। गांव के प्रवेश के हर रास्ते पर पहरा बैठा दिया गया है। गांव को चौतरफा तार लगाकर घेर दिया गया है। रेलवे ट्रैक के आसपास आरएएफ तैनात है। किसी को नहीं मालूम कि गांव के भीतर क्या हो रहा है। ग्रामीणों की पहचान कराकर उन्हें गांव में प्रवेश करने दिया जा रहा है। बाहरी व्यक्तियों को तो दूर, मीडिया को भी कचरी गांव में प्रवेश से रोक दिया गया है। अगर किसी ने विरोध किया तो उसे लाठियां भी खानी पड़ रही हैं। शुक्रवार को कुछ ग्रामीण गांव से बाहर आए तो उनके चेहरे पर डर साफ झलक रहा था।
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आसपास गांव में रहने वालों ने बताया कि कचरी के ज्यादातर घरों में सिर्फ महिलाएं बची हैं।

 पुरुष गांव छोड़कर कहीं और चले गए है ताकि उन्हें पुलिस की सख्ती का सामना न करना पड़ा। सूत्रों का कहना है कि कचरी के किसान अब पावर प्लांट का विरोध भी नहीं कर रहे हैं, इसके बावजूद उनकी स्थिति नजरबंद जैसी है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन का यह रवैया नए बवाल को जन्म दे सकता है। इस बीच भीरपुर रेलवे स्टेशन पर भी बड़ी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गई है। वहां यात्रियों से ज्यादा सुरक्षा कर्मी नजर आ रहे हैं। ऐसे में स्टेशन परिसर में भय का माहौल बना हुआ है। इलाहाबाद-मिर्जापुर सड़क मार्ग पर भी जगह-जगह फोर्स तैनात की गई है।
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कचरी गांव के प्रधान राम लाल पटेल का कहना है कि गांव में पहरा लग जाने से रोजगार के लिए गांव से बाहर नहीं जा पा रहे हैं। बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं, सो गांव में रहने वाले तमाम छात्र-छात्राएं दूसरे गांवों में अपने रिश्तेदारों या करीबियों के घर में ठहरे हुए हैं ताकि परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में उन्हें किसी अड़चन का सामना न करना पड़ा। दूसरे गांव में पढ़ने वाले कचरी गांव के बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। प्रशासन की सख्ती से गांव के लोग डरे-सहमे हैं।
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‘तीन दिन पहले मेरे पति का निधन हो गया। प्रशासन की सख्ती के कारण तमाम रिश्तेदार और करीबी गांव तक नहीं पहुंच सके। किसी से कोई मदद नहीं मिल रही है। प्रशासन ने खड़ी और हरी फसल पर बुल्डोजर चलवा दिया। फसल बर्बाद हो गई, जो अब सिर्फ पशुओं को चारे के रूप में खिलाई जा सकती है। बेटी की शादी भी तय है। फसल बर्बाद होने से काफी नुकसान हुआ है। चिंता सता रही है कि बेटी की शादी के लिए पैसे का इंतजाम कहां से होगा’ धनपत्ति देवी, भिटार गांव

‘प्रशासन को अगर खेतों में बुल्डोजर चलवना  था तो कुछ दिन इंतजार कर सकता था ताकि फसल बर्बाद न होती। अपने खेत में बुल्डोजर चलवाने का विरोध किया तो वहां मौजूद सिपाही ने कई थप्पड़ जड़ दिए और जेल भेजने की धमकी दी। खेत में बुल्डोजर चलवाए जाने से फसल का काफी हिस्सा बर्बाद हो गया।’ शिवनाथ, भिटार गांव

‘पहले अतिवृष्टि और फिर सूखे से फसल बर्बाद हो गई। किसी तरह कर्ज लेकर गेहूं, सरसों की बोवाई की तो खड़ी फसल पर बुल्डोजर चलवा दिया गया। फसल तो बर्बाद हुई ही, घर भी छोड़ना पड़ेगा। पावर प्लांट के लिए प्रस्तावित जमीन पर मेरा दो कमरों का पक्का मकान है। प्रशासन ने विकल्प के तौर पर निवास की कोई व्यवस्था नहीं की। पावर प्लांट का निर्माण शुरू होने पर घर-गांव छोड़कर जाना पड़ेगा। कहां जाएंगे, समझ में नहीं आ रहा।’ फोटो देवी, कचरी गांव


‘अगर प्रशासन की तरफ से पहले ही बना दिया गया होता कि निर्माण किस वक्त शुरू कराया जाएगा तो गेहूं, सरसों की बोवाई न की जाती। कर्ज लेकर फसल तैयार की लेकिन खेत पर बुल्डोजर चलवा दिए जाने से फसल बर्बाद हो रही है। रातोंरात फोर्स तैनात कर देना और फिर 24 घंटे के भीतर बिना सूचना दिए खेतों पर बुल्डोजर चलवा देना किसानों के साथ अन्याय है।’ शिवपत्ति देवी, भिटार गांव
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