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प्रदर्शन कर रहे वामपंथियों पर हमले की संगठनों ने की निंदा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 25 Feb 2016 11:23 PM IST
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रोहित वेमुला की आत्महत्या, जेएनयू की घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराए जाने, कन्हैया कुमार की रिहाई सहित 11 सूत्रीय मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को प्रदर्शन कर रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (लेनिनवादी), सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्यूनिस्ट), रिवोल्यूशनरी, सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक के कार्यकर्ताओं पर वकीलों के एक गुट की ओर से किए गए हमले को लेकर कर्मचारी संगठनों के साथ विभिन्न जनसंगठनों ने निंदा की है। संगठनों ने इस हमले को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है। कहा कि यह संविधान के मूलअधिकारों का हनन है।
वामपंथी पार्टियों ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पर संयुक्त रूप से प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन डीएम को सौंपने का निर्णय लिया था। प्रदर्शन के दौरान वकीलों के एक गुट ने हमला बोल दिया और प्रदर्शनकारियों को खदेड़-खदेड़ कर मारा। यहां तक की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ा। वकीलों की ऐसी हरकत को लेकर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट(आईपीएफ), रोजी रोटी बचाओ मोर्चा, पीपुल्स यूनियन फॉर ह्यूमन राइट, भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) सहित विभिन्न संगठनों ने निंदा की। इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। संगठन के सदस्यों ने कहा कि यह हमला वामपंथियों पर जानबूझकर कराया गया।
भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाया कि वह अपने सांप्रदायिक विचारों को राष्ट्रवादी जामा पहनाकर पूरे देश पर थोपने की कोशिश में लगा है। पीपुल्स यूनियन फॉर ह्यूमन राइट के जिला संयोजक शम्स विकास ने ऐसे वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सदस्यों ने हमला करने वाले अधिवक्ताओं के लाइसेंस रद्द करने की मांग की। भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी के डॉ. आशीष मित्तल ने इसे जनविरोधी भावन को दबाने का आरोप लगाया। एटक के महामंत्री रामसागर इसे तानाशाही बताया। रोजी रोटी बचाओ मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अनु सिंह ने कहा कि यह कानून व्यवस्था की अवहेलना है। आईपीएफ के राजेश सचान ने कहा कि ऐसी बर्बर कार्रवाई करने वालों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
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वामपंथी पार्टियों ने बृहस्पतिवार को जिला मुख्यालय पर संयुक्त रूप से प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन डीएम को सौंपने का निर्णय लिया था। प्रदर्शन के दौरान वकीलों के एक गुट ने हमला बोल दिया और प्रदर्शनकारियों को खदेड़-खदेड़ कर मारा। यहां तक की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ा। वकीलों की ऐसी हरकत को लेकर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट(आईपीएफ), रोजी रोटी बचाओ मोर्चा, पीपुल्स यूनियन फॉर ह्यूमन राइट, भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी, अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) सहित विभिन्न संगठनों ने निंदा की। इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। संगठन के सदस्यों ने कहा कि यह हमला वामपंथियों पर जानबूझकर कराया गया।
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भाजपा और आरएसएस पर आरोप लगाया कि वह अपने सांप्रदायिक विचारों को राष्ट्रवादी जामा पहनाकर पूरे देश पर थोपने की कोशिश में लगा है। पीपुल्स यूनियन फॉर ह्यूमन राइट के जिला संयोजक शम्स विकास ने ऐसे वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सदस्यों ने हमला करने वाले अधिवक्ताओं के लाइसेंस रद्द करने की मांग की। भाकपा (माले) न्यू डेमोक्रेसी के डॉ. आशीष मित्तल ने इसे जनविरोधी भावन को दबाने का आरोप लगाया। एटक के महामंत्री रामसागर इसे तानाशाही बताया। रोजी रोटी बचाओ मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अनु सिंह ने कहा कि यह कानून व्यवस्था की अवहेलना है। आईपीएफ के राजेश सचान ने कहा कि ऐसी बर्बर कार्रवाई करने वालों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
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