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अनुपस्थित कक्ष निरीक्षकों पर होगी एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 19 Feb 2016 11:39 PM IST
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यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन प्रदेश भर में आधे से अधिक कक्ष निरीक्षकों के अनुपस्थित रहने को बोर्ड के अधिकारियों ने गंभीरता से लिया है। बोर्ड ने इन कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने को कहा है। पहले दिन की परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों के नहीं पहुंचने से अफरा-तफरी के बीच बाबुओं और चपरासियों ने परीक्षा पूरी कराई थी। इस बात को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से अनुपस्थित कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
जिला विद्यालय निरीक्षकों ने सभी केंद्र व्यवस्थापकों से अनुपस्थित कक्ष निरीक्षकों की जानकारी मांगी है। शुक्रवार शाम तक बोर्ड मुख्यालय में दोषी कक्ष निरीक्षकों के बारे जानकारी नहीं मिल सकी थी। बोर्ड ने भविष्य में कक्ष निरीक्षकों को लेकर परीक्षा के दौरान अराजकता की स्थिति न बने इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षकों से केंद्र व्यवस्थापकों को सावधान रहने को कहा गया है।
यूपी बोर्ड और जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से गलत सूची जारी करने और परीक्षकों को परिचय पत्र जारी नहीं करने से अधिक परेशानी हुई। बोर्ड की ओर से सभी प्रधानाचार्यों को दूसरे विद्यालयों में परीक्षा ड्यूटी में लगाए गए शिक्षकों को कार्य मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। बोर्ड की ओर से भी परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए शिक्षकों को परीक्षा कार्य में पहुंचने को कहा गया है। बोर्ड ने लापरवाह कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई को कहा है।
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यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन सात लाख 42 हजार छात्र-छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी। बोर्ड परीक्षा के पहले दिन हाईस्कूल में हिंदी एवं इंटरमीडिएट में भी हिंदी एवं सामान्य हिंदी की अनिवार्य प्रश्नपत्र की परीक्षा में ही सात लाख 42 हजार परीक्षार्थी परीक्षा छोड़ कर भाग गए। यूपी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा में नकलचियों पर बरती गई सख्ती के कारण इतनी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी। बोर्ड के दावे की हवा उस समय निकल जा रही है कि बिना परीक्षा शुरू हुए उनकी सख्ती के कारण नकल करने वाले परीक्षा छोड़ कर चले गए।नकलचियों पर सख्ती के कारण यदि परीक्षा छोड़ी गई तो एक दिन की परीक्षा के बाद छत्र-छात्राएं परीक्षा छोड़ते परीक्षा शुरू होने के साथ ही कैसे परीक्षा छोड़ देंगे।
बोर्ड परीक्षा के दौरान अबकी बार अनुपस्थित परीक्षार्थियों की जानकारी देने केलिए मोबाइल ऐप की व्यवस्था लागू की गई थी। परीक्षा केपहले दिन ही मोबाइल ऐप के फेल हो जाने के बाद बोर्ड को पुरानी व्यवस्था के अनुसार अनुपस्थित छात्रों की जानकारी जुटानी पड़ी। बोर्ड सचिव शैल यादव का कहना है कि गाजीपुर में 36, बलिया 34 एवं इलाहाबाद में 32 हजार छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी। इसके साथ आगरा, अलीगढ़, हरदोई, प्रतापगढ़, वाराणसी, गाजीपुर, गोरखपुर जैसे जिलों में प्रत्येक में 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी। बोर्ड के अधिकारी भले ही पहले दिन परीक्षा में सख्ती के कारण सात लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के परीक्षा छोड़ने की बात कर रहे हों परंतु बोर्ड परीक्षा के पिछले वर्ष के आंकडों को देखा जाए तो इतने बोगस परीक्षार्थी हर वर्ष परीक्षा छोड़ते रहे हैं।
यूपी बोर्ड परीक्षा के दूसरे दिन प्रदेश भर में कुल 76 नकलची पकड़े गए। इसमें 58 छात्र एवं 18 छात्राएं शामिल हैं। यूपी बोर्ड की सचिव शैल यादव ने बताया कि सख्ती के कारण बड़ी संख्या में नकलचियों ने परीक्षा छोड़ दी। इसके बाद भी नकल की कोशिश करने वालों को पकड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सामूहिक नकल पकड़े जाने पर केंद्र व्यवस्थापक एवं जिम्मेदार शिक्षक पर एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है।
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जिला विद्यालय निरीक्षकों ने सभी केंद्र व्यवस्थापकों से अनुपस्थित कक्ष निरीक्षकों की जानकारी मांगी है। शुक्रवार शाम तक बोर्ड मुख्यालय में दोषी कक्ष निरीक्षकों के बारे जानकारी नहीं मिल सकी थी। बोर्ड ने भविष्य में कक्ष निरीक्षकों को लेकर परीक्षा के दौरान अराजकता की स्थिति न बने इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षकों से केंद्र व्यवस्थापकों को सावधान रहने को कहा गया है।
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यूपी बोर्ड और जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से गलत सूची जारी करने और परीक्षकों को परिचय पत्र जारी नहीं करने से अधिक परेशानी हुई। बोर्ड की ओर से सभी प्रधानाचार्यों को दूसरे विद्यालयों में परीक्षा ड्यूटी में लगाए गए शिक्षकों को कार्य मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। बोर्ड की ओर से भी परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए शिक्षकों को परीक्षा कार्य में पहुंचने को कहा गया है। बोर्ड ने लापरवाह कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई को कहा है।
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यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन सात लाख 42 हजार छात्र-छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी। बोर्ड परीक्षा के पहले दिन हाईस्कूल में हिंदी एवं इंटरमीडिएट में भी हिंदी एवं सामान्य हिंदी की अनिवार्य प्रश्नपत्र की परीक्षा में ही सात लाख 42 हजार परीक्षार्थी परीक्षा छोड़ कर भाग गए। यूपी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा में नकलचियों पर बरती गई सख्ती के कारण इतनी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी। बोर्ड के दावे की हवा उस समय निकल जा रही है कि बिना परीक्षा शुरू हुए उनकी सख्ती के कारण नकल करने वाले परीक्षा छोड़ कर चले गए।नकलचियों पर सख्ती के कारण यदि परीक्षा छोड़ी गई तो एक दिन की परीक्षा के बाद छत्र-छात्राएं परीक्षा छोड़ते परीक्षा शुरू होने के साथ ही कैसे परीक्षा छोड़ देंगे।
बोर्ड परीक्षा के दौरान अबकी बार अनुपस्थित परीक्षार्थियों की जानकारी देने केलिए मोबाइल ऐप की व्यवस्था लागू की गई थी। परीक्षा केपहले दिन ही मोबाइल ऐप के फेल हो जाने के बाद बोर्ड को पुरानी व्यवस्था के अनुसार अनुपस्थित छात्रों की जानकारी जुटानी पड़ी। बोर्ड सचिव शैल यादव का कहना है कि गाजीपुर में 36, बलिया 34 एवं इलाहाबाद में 32 हजार छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी। इसके साथ आगरा, अलीगढ़, हरदोई, प्रतापगढ़, वाराणसी, गाजीपुर, गोरखपुर जैसे जिलों में प्रत्येक में 10 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी। बोर्ड के अधिकारी भले ही पहले दिन परीक्षा में सख्ती के कारण सात लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के परीक्षा छोड़ने की बात कर रहे हों परंतु बोर्ड परीक्षा के पिछले वर्ष के आंकडों को देखा जाए तो इतने बोगस परीक्षार्थी हर वर्ष परीक्षा छोड़ते रहे हैं।
यूपी बोर्ड परीक्षा के दूसरे दिन प्रदेश भर में कुल 76 नकलची पकड़े गए। इसमें 58 छात्र एवं 18 छात्राएं शामिल हैं। यूपी बोर्ड की सचिव शैल यादव ने बताया कि सख्ती के कारण बड़ी संख्या में नकलचियों ने परीक्षा छोड़ दी। इसके बाद भी नकल की कोशिश करने वालों को पकड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सामूहिक नकल पकड़े जाने पर केंद्र व्यवस्थापक एवं जिम्मेदार शिक्षक पर एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है।