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इलाहाबाद संग्रहालय : दो दशक से जमीन पर रखी थीं पांडुलिपियां, दुर्लभ पेंटिंग भी हुई बर्बाद

Sat, 02 Mar 2024 12:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 02 Mar 2024 12:23 PM IST
सार

इलाहाबाद संग्रहालय प्रतिवर्ष लाखों रुपये का बजट पांडुलिपि और ताड़पत्रों के संरक्षण के लिए आता है, लेकिन संग्रहालय की दुर्लभ पांडुलिपियां नष्ट हो रही हैं। उन्हें दीमक चट कर रही हैं।

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Allahabad Museum: Manuscripts were kept on the ground for two decades
इलाहाबाद संग्रहालय में रख रखाव के अभाव में नष्ट हो रहे दुर्लभ अभिलेख। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुर्लभ ताड़पत्रों के अलावा पांडुलिपियों के दो दशक से इलाहाबाद संग्रहालय के एक कमरे में बिना किसी संरक्षण केे रखे जाने की बात सामने आई है। पता चला है कि यह पांडुलिपियां 2004 में तत्कालीन निदेशक उदय शंकर तिवारी के निर्देश पर संग्रह के लिए लिखापढ़ी के बाद लाई गई थीं। तब इसके लिए कमेटी के गठन की भी बात सामने आई है। लेकिन, आपसी खींचतान में उनका संरक्षण नहीं किया गया। अलबत्ता इन ताड़पत्रों के साथ कई बहुमूल्य पेंटिंग भी इसी कक्ष में जमीन पर रखे जाने से बर्बाद हो गई।

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ऐसा तब हुआ जब ऐसे हस्तलेखों और महत्वपूर्ण चित्रों को दीमकों से बचाने के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपये का बजट दिया जाता है। सात महीने पहले चार अगस्त 2023 को छह सदस्यीय कमेटी की ओर से पांडुलिपियों और ताड़पत्रों की जांच रिपोर्ट संग्रहालय प्रशासन को दी गई, लेकिन इस पर कार्रवाई की बजाय चुप्पी साध ली गई। जांच रिपोर्ट के साथ ही वहां की बर्बादी की तस्वीरें ली गईं और वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। इसमें दुर्लभ पांडुलिपियों के सैकड़ों पन्ने टूटकर उस कक्ष में बिखरे हुए साफ देखे जा सकते हैं।

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Allahabad Museum: Manuscripts were kept on the ground for two decades
इलाहाबाद संग्रहालय में रख रखाव के अभाव में नष्ट हो रहे दुर्लभ अभिलेख। - फोटो : अमर उजाला

मिट्टी में तब्दील हो रहे अभिलेख

इन हस्तलेखों की अनदेखी किस हद तक की गई इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिन बस्तों में ताड़पत्र और पांडुलिपियां रखी गई थीं, उसके कई हिस्से मिट्टी में तब्दील हो गए हैं। नियमानुसार बिना विक्रय कमेटी के गठन के किसी ऐसे दस्तावेज या बहुमूल्य संपदा का हस्तांतरण नहीं कराया जा सकता। ऐसे में इन पांडुलिपियों के लिए कब और किसके नेतृत्व में कमेटी बनाई गई थी, इस पर भी संग्रहालय प्रशासन के पास कोई जवाब नहीं है।

 

पुस्तकालय में रखी पांडुलपियां भी नहीं रखी गईं स्ट्रांग रूम में

इसके अलावा बड़ी संख्या में पांडुलिपियों संरक्षित न कर पुस्तकालय में रखी हुई हैं। वर्षों पहले पुस्तकालय में रखी पांडुलिपियों को निकालकर संरक्षित किए जाने के आदेश किए थे, लेकिन उसे भी नजर अंदाज कर दिया गया।

संग्रहालय प्रशासन ने दी सफाई, संग्रह के योग्य नहीं थे ताड़पत्र और हस्तलेख

प्रयागराज। इलाहाबाद संग्रहालय प्रशासन की ओर से शुक्रवार को पांडुलिपियों और ताड़पत्रों के नष्ट होने पर सफाई दी गई। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2004 में यह पांडुलिपियां और ताड़पत्र लाए गए थे। उस समय कंजर्वेशन लैब की रिपोर्ट मंगाई गई तब पता चला कि वह पांडुलिपियां संग्रह के योग्य नहीं हैं। ऐसे में उन्हें पंजीकृत नहीं किया गया और उनके संरक्षण की जरूरत नहीं समझी गई। उधर, छह सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में रसायन सहायक और कंजर्वेशन अधिकारी श्वेता सिंह ने अपनी टिप्पणी भी दी है।

श्वेता ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जहां पांडुलिपियां और ताड़पत्र रखे गए थे, वह रिजर्व कमरा नहीं, बल्कि चैंबर है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है कि वहां ताड़पत्रों में दीमक का उपचार पूर्व में सहायक रसायनज्ञ की ओर से किया जा चुका है। अब सवाल उठता है कि जब वह ताड़पत्र संग्रह में नहीं थे और उन्हें खुले हाल में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया था, तब उनका दीमकों से उपचार क्यों कराया जाता रहा। फिलहाल ऐसे सवालों पर संग्रहालय प्रशासन मौन है।

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