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Allahabad Lok Sabha : इलाहाबाद में 40 साल से कांग्रेस को जीत का इंतजार, अमिताभ के बाद कोई नहीं दिला सका जीत

Tue, 04 Jun 2024 05:49 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 04 Jun 2024 05:49 AM IST
सार

1984 में अमिताभ बच्चन ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी, लेकिन इसके बाद 1988 के उपचुनाव व 1989 में पार्टी दूसरे स्थान पर रही। वहीं, 1991 के बाद से तो कांग्रेस उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा पाए। 1991 से 2019 के बीच आठ बार लोकसभा चुनाव हुए, लेकिन 1999 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहीं रीता बहुगुणा जोशी जमानत बचा पाई थीं।

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Allahabad Lok Sabha: Congress has been waiting for victory in Allahabad for 40 years, after Amitabh no one cou
कांग्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की इलाहाबाद संसदीय सीट पर कांग्रेस को 40 वर्षों से जीत का इंतजार है। पार्टी को इस बार काफी उम्म्मीदें हैं। यदि ऐसा होता है तो 1984 में अमिताभ बच्चन के बाद कांग्रेस को जीत नसीब होगी। विगत कई चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार जमान तक भी नहीं बचा पाए हैं।

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1984 में अमिताभ बच्चन ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी, लेकिन इसके बाद 1988 के उपचुनाव व 1989 में पार्टी दूसरे स्थान पर रही। वहीं, 1991 के बाद से तो कांग्रेस उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा पाए। 1991 से 2019 के बीच आठ बार लोकसभा चुनाव हुए, लेकिन 1999 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहीं रीता बहुगुणा जोशी जमानत बचा पाई थीं। इनके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे नंद गोपाल गुप्ता नंदी को ही एक लाख दो हजार 453 वोट मिले थे। लेकिन, वह भी जमानत नहीं बचा पाए थे। अन्य चुनावों में तो कांग्रेस प्रत्याशी 50 हजार मतों के लिए भी जूझते नजर आए। खास यह कि डॉ.रीता और नंदी दोनों नेता इस समय भाजपा में हैं।

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हालांकि, कांग्रेस के लिए इस बार कहानी कुछ अलग है। सपा के साथ गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के पास आई और पार्टी ने क्षेत्र के दिग्गज नेता रेवती रमण सिंह के बेटे व पूर्व मंत्री रहे उज्ज्वल रमण सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं, भाजपा ने पूर्व राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के बेटे नीरज को प्रत्याशी बनाया है। इन दोनों प्रत्याशियों के बीच काफी नजदीकी मुकाबला बताया जा रहा है।

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