फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   allahabad

रेती का प्रसाद लेकर लौटे कल्पवासी

Tue, 23 Feb 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद Updated Tue, 23 Feb 2016 01:48 AM IST
विज्ञापन
allahabad

माघी पूर्णिमा के स्नानपर्व के साथ रेती पर माह भर के कल्पवास का संकल्प सोमवार को पूरा हुआ। लाखों श्रद्धालुओं ने संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाई। माह भर से संगम की रेती पर बसे कल्पवासी अपने साथ रेती का पुण्य और प्रसाद लेकर घरों को लौटे। प्रशासन ने तकरीबन 45 लाख स्नानार्थियों के डुबकी लगाने का दावा किया है।

विज्ञापन

माघी पूर्णिमा का पुण्यकाल पूरे दिन होने के कारण सुबह स्नान करने वालों की संख्या कम ही रही लेकिन सूर्योदय के साथ ही संगम तट पर भीड़ बढ़ती गई। हर-हर गंगे, माधव सकल काम साधो का जयकारा लगाकर श्रद्धालु त्रिवेणी तट पहुंचे। हालांकि माघ मेला क्षेत्र में 14 घाट बनाए गए थे पर सभी की साध संगम स्नान की रही। मीलों पैदल चलने के बावजूद जोश और उत्साह कम नहीं हुआ। संगम पर डुबकी के बाद भगवान विष्णु का पूजन और हवन तथा पितरों की प्रसन्नता के लिए दान किया गया। घर के लिए गंगाजली और डिब्बों में गंगाजल ले गए। मां गंगा की पूजा अर्चना कर तीर्थ पुरोहितों को दान दिया। 

विज्ञापन

गांव घर परिवार में प्रसाद बांटने के लिए सिंदूर, इलायची दाना चुनरी आदि खरीदा और फिर आने के वायदे के साथ घर को लौट गए। हालांकि अधिकतर कल्पवासियों ने कल्पवास के अनुष्ठान रविवार को ही पूरे कर लिए थे।  वहीं कइयों ने पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण कथा सुनी। तीर्थपुरोहितों की देखरेख में संगम तट और शिविर में हवन पूजन किया। शिविर के बाहर बोई जौ और तुलसी का बिरवा पूजन अर्चन  के बाद परंपरानुसार संगम में विसर्जित किया गया। कई अपनी मान्यतानुसार तुलसी के बिरवा को घर ले गए। पूर्णिमा स्नान पर मेला क्षेत्र में 375भूले भटके स्त्री-पुरुषों एवं 08 बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

मकरसंक्रांति स्नान पर्व से गुलजार संगम की रेती माघी पूर्णिमा स्नान के साथ सूनी हो गई। माघ मेला क्षेत्र दंडीबाड़ा, आचार्य बाड़ा, काली मार्ग, त्रिवेणी मार्ग, महावीर मार्ग स्थित संतों के शिविरों में हो रही रामलीला, रासलीला और प्रवचन पूरा हुआ। उज्जैन कुंभ में मिलने के वायदे के साथ संत महात्माओं ने एक दूसरे से विदा ली। मेला क्षेत्र में वही संत और कल्पवासी रह गए हैं जो त्रिजटा स्नान करने के बाद ही मेला क्षेत्र से विदा होंगे। 


गंगा सेवा अभियानम के संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने माघी पूर्णिमा पर यमुना में डुबकी लगाई। कल्पवास के अनुष्ठान पूरे करने के बाद वह यमुना तट पहुंचे। यमुना पूजा अर्चना के बाद स्नान किया। फिर मनकामेश्वर महादेव मंदिर में षोडशोपचार पूजन और रुद्राभिषेक किया।


खाक चौक के त्यागी संतों ने माघी पर संगम पर दोहरी यानी सुबह और शाम डुबकी लगाई। महामंत्री सतुआ बाबा संतोषदास ने बताया माघी पूर्णिमा पर उगते और डूबते सूर्य के पूजन का विधान है। डुबकी लगाने वालों में महंत जगतरामदास, महंत दामोदर दास, महंत रामतीरथ दास आदि रहे। 


माघ मेला के सकुशल पूरा होने के उपलक्ष्य में मेला प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र स्थित कार्यालय में सत्यनारायण की कथा का आयोजन हुआ। प्रभारी मेलाधिकारी हरिओम शर्मा ने कथा सुनी। इस मौके पर माघ मेला प्रशासन की पूरी टीम मौजूद थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed