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Allahabad highcourt: जमानत की फाइलें समय से पहुंचाने की करें व्यवस्था

Wed, 18 May 2022 01:18 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 18 May 2022 01:18 AM IST
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Allahabad highcourt: Make arrangements for timely delivery of bail files
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
हाईकोर्ट ने प्रदेश के महाधिवक्ता से पॉक्सो एक्ट के तहत अभियुक्तों की जमानत अर्जी की सरकारी फाइलों को कोर्ट में समय पर पहुंचाने के लिए उपाय करने को कहा है। हाईकोर्ट ने कह कि यह व्यवस्था जरूरी है, ताकि कोर्ट का कीमती समय बर्बाद न होे। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने संजय कुमार उर्फ पिंटू की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि महाधिवक्ता कार्यालय हाईकोर्ट भवन के पास ही है,  फिर भी फाइलें कोर्ट में नहीं पहुंच रही हैं। इस पर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि शोएब केस में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जमानत मामलों की पूर्व तैयारी करने की गाइडलाइंस जारी करने का निर्देश दिया था।
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जिसपर हलफनामा दाखिल कर बताया गया था कि पॉक्सो एक्ट के अभियुक्त की जमानत अर्जी की फाइल एक दिन पहले शाम चार बजे तैनात सभी अपर शासकीय अधिवक्ताओं को प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें तैयारी का पर्याप्त मौका मिले और वे अदालत का सहयोग कर सकें। कोर्ट ने कहा कि इस हलफनामे का पालन नहीं किया जा रहा है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है, जिस पर कार्रवाई के लिए महाधिवक्ता को आदेश की प्रति दी जाए।
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कोर्ट ने कहा कि जुनैद केस में पॉक्सो एक्ट के अभियुक्त की जमानत अर्जी की पीड़ित पक्ष को त्वरित जानकारी देने और उसे निऱ्शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देशों पर भी ठीक से अमल नहीं किया जा रहा है। विधिक सेवा समिति हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए समय मांगा। जिस पर कोर्ट ने अर्जी को सुनवाई हेतु 30 मई 22 को पेश करने का निर्देश दिया है। 


याची पाक्सो एक्ट के तहत अपराध का आरोपी है। मुकदमे का ट्रायल चल रहा है। पीड़िता की तरफ से पक्ष नहीं रखा गया। कोर्ट ने कहा कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण व विधिक सेवा समिति हाईकोर्ट को इस मामले में निर्देश दिए गए थे कि बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट पीड़िता को दी जाए।


जमानत अर्जी दाखिल होने की सूचना के साथ निऱ्शुल्क अधिवक्ता दिया जाए और पीड़िता को संरक्षण दिया जाए। इस पर अमल नहीं किया जा रहा है। समिति के अधिवक्ता ने कहा कि पीड़िता को संरक्षण प्रदान किया गया है, किंतु संवाद की कमी है। उन्होंने बेहतर जानकारी देने के लिए कोर्ट से समय मांगा।
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