{"_id":"5d9257d38ebc3e01314994a5","slug":"allahabad-highcourt-allahabad-news-ald2563655193","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेयजल परियोजना प्रबंधक की जांच तीन माह में पूरी करने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पेयजल परियोजना प्रबंधक की जांच तीन माह में पूरी करने का आदेश
विज्ञापन
Allahabad Highcourt
प्रबंधक पर घोटाले में शामिल होने का आरोप
प्रयागराज। वाराणसी में 227.21 करोड़ रुपये की पेयजल परियोजना में घोटाले के आरोपी परियोजना प्रबंधक के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन माह में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद पांडेय पर परियोजना को टुकड़ों में बांट कर गुणवत्ता के खिलाफ काम कराने का आरोप है। मुख्यमंत्री के आदेश पर तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। याची को निलंबित कर प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर नियमित जांच बैठाई गई है। साथ ही ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का भी आदेश दिया गया है। कोर्ट ने याची को सुनवाई का पूरा मौका देकर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने परियोजना प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद पांडेय की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याची का कहना था कि उसे निलंबित करने के पहले आरोपों पर विचार नहीं किया गया। बिना उसका पक्ष सुने निलंबन आदेश दे दिया गया। कोर्ट ने प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा। जिस पर पेश रिपोर्ट में आरोपों को प्रारंभिक जांच में सही पाया गया। अब कोर्ट ने याची का पक्ष सुनकर नियमित जांच करने का आदेश दिया है।
याची का कहना था कि जनवरी 2020 में वह सेवानिवृत्त हो रहा है। इससे पहले जांच पूरी कर ली जाए। कोर्ट ने याची को 15 दिन में आरोपों का जवाब दाखिल करने और जांच में सहयोग करने का भी आदेश दिया है। घोटाले के आरोप में पूर्व प्रबंध निदेशक केके श्रीवास्तव , प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद पांडेय और प्रबंधक सतीस कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। आदेश में यह भी कहा गया है कि सेवानिवृत्त अधिकारी के पेंशन से वसूली की जाए।
विज्ञापन
मामले के अनुसार वाराणसी में पेयजल परियोजना का ठेका एक बड़ी कंपनी को दिया गया। उसने मुख्य मार्गों का काम कराया और गलियों का छोड़ दिया। कहा कि 80 प्रतिशत काम करा दिया है। बचे काम का भुगतान नहीं लेगा। कंपनी ने अपना बचा हुआ सामान विभाग को बेच कर भुगतान भी ले लिया ।
इसके बाद गलियों का काम अधिकारियों ने छोटे ठेकेदारों से बिना टेंडर जारी किए कराया। काम मनमाने तौर पर कराने और घोटाले की शिकायत की गई। जिस पर अधिकारियों और छोटे ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई किंतु काम अधूरा छोड़कर भागने वाली बड़ी कंपनी कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप है।
विज्ञापन
प्रयागराज। वाराणसी में 227.21 करोड़ रुपये की पेयजल परियोजना में घोटाले के आरोपी परियोजना प्रबंधक के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन माह में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद पांडेय पर परियोजना को टुकड़ों में बांट कर गुणवत्ता के खिलाफ काम कराने का आरोप है। मुख्यमंत्री के आदेश पर तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। याची को निलंबित कर प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर नियमित जांच बैठाई गई है। साथ ही ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का भी आदेश दिया गया है। कोर्ट ने याची को सुनवाई का पूरा मौका देकर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने परियोजना प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद पांडेय की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याची का कहना था कि उसे निलंबित करने के पहले आरोपों पर विचार नहीं किया गया। बिना उसका पक्ष सुने निलंबन आदेश दे दिया गया। कोर्ट ने प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा। जिस पर पेश रिपोर्ट में आरोपों को प्रारंभिक जांच में सही पाया गया। अब कोर्ट ने याची का पक्ष सुनकर नियमित जांच करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
याची का कहना था कि जनवरी 2020 में वह सेवानिवृत्त हो रहा है। इससे पहले जांच पूरी कर ली जाए। कोर्ट ने याची को 15 दिन में आरोपों का जवाब दाखिल करने और जांच में सहयोग करने का भी आदेश दिया है। घोटाले के आरोप में पूर्व प्रबंध निदेशक केके श्रीवास्तव , प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद पांडेय और प्रबंधक सतीस कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। आदेश में यह भी कहा गया है कि सेवानिवृत्त अधिकारी के पेंशन से वसूली की जाए।
विज्ञापन
मामले के अनुसार वाराणसी में पेयजल परियोजना का ठेका एक बड़ी कंपनी को दिया गया। उसने मुख्य मार्गों का काम कराया और गलियों का छोड़ दिया। कहा कि 80 प्रतिशत काम करा दिया है। बचे काम का भुगतान नहीं लेगा। कंपनी ने अपना बचा हुआ सामान विभाग को बेच कर भुगतान भी ले लिया ।
इसके बाद गलियों का काम अधिकारियों ने छोटे ठेकेदारों से बिना टेंडर जारी किए कराया। काम मनमाने तौर पर कराने और घोटाले की शिकायत की गई। जिस पर अधिकारियों और छोटे ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई किंतु काम अधूरा छोड़कर भागने वाली बड़ी कंपनी कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप है।