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Allahabad High Court : सेवानिवृत्त के बाद आक्षेपित आदेश पास करना गलत
Thu, 14 Jul 2022 07:59 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 14 Jul 2022 07:59 PM IST
सार
मामले में याची उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में कार्यालय सहायक ग्रेड-वन के पद पर तैनात था। एक शिकायत के मामले में 2011 में उसे एक आरोपपत्र थमाया गया। वह अप्रैल 2012 में सेवानिवृत्त हो गया। मामले में अगस्त में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और उन पर आरोप आक्षेपित किया गया।
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- फोटो : istock
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त के बाद आक्षेपित आदेश पास करना गलत है। कोर्ट ने मामले में याची को आठ फीसदी की दर से उसे सेवानिवृत्त के बाद बची हुई रकम को देने का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने एटा के नरसिंह पाल की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
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मामले में याची उत्तर प्रदेश परिवहन निगम में कार्यालय सहायक ग्रेड-वन के पद पर तैनात था। एक शिकायत के मामले में 2011 में उसे एक आरोपपत्र थमाया गया। वह अप्रैल 2012 में सेवानिवृत्त हो गया। मामले में अगस्त में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और उन पर आरोप आक्षेपित किया गया।
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याची के अधिवक्ता ने कहा कि यह गलत है। याची ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया। कहा कि सेवानिवृत्त के बाद कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर उसके बकाए के भुगतान का आदेश दिया।
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