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UP: 'ऐसी कार्रवाई करें कि निजी प्रैक्टिस छोड़ दें डॉक्टर', इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी; किया जवाब तलब

Mon, 03 Mar 2025 12:54 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 03 Mar 2025 12:54 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ऐसी कार्रवाई करे, जिसे देख दूसरे सरकारी डॉक्टर खुद निजी प्रैक्टिस से दूर हो जाएं। हाईकोर्ट ने 37 जिलों की अधूरी रिपोर्ट देने पर प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से जवाब तलब किया है।

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Allahabad High Court says The government should Take such action that doctors give up private practice
docter demo - फोटो : Freepik

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेशभर में निजी प्रैक्टिस कर रहे सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई पूरी नहीं करने व अधूरी रिपोर्ट देने पर नाराजगी जताई है। 26 मार्च तक प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। 
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वहीं, टिप्पणी कर कहा है कि सरकार ऐसी कार्रवाई करे, जिसे देख दूसरे सरकारी डॉक्टर खुद निजी प्रैक्टिस से दूर हो जाएं। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के किडनी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद गुप्ता की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। 
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राज्य उपभोक्ता आयोग की ओर से निजी नर्सिंग होम में सेवा देने के लिए इन पर लगे 10 लाख के हर्जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य से जबाव तलब किया था।
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आदेश के अनुपालन में हलफनामा दाखिल कर प्रमुख सचिव ने बताया कि छह जनवरी को निर्देश के क्रम में 37 जिले के डीएम ने निजी प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों को चिह्नित किया है। इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा रही है।

पेश हलफनामे में कोर्ट ने पाया कि सरकार निजी प्रैक्टिस में लिप्त पाए गए डॉक्टराें के खिलाफ की जा रही अनुशासनात्मक कार्रवाई की रफ्तार पर मौन है। अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को जल्द कार्रवाई पूरा करने का आश्वासन दे बाकी जिलों की रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा से 26 मार्च तक पूरी जानकारी के साथ व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
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